मेरी कस्तूरी-सी दोस्त-अंजना

दो महिला मित्र मुस्कुराते हुए साथ चलती हुई

अर्चना ज्ञानी, उज्जैन

खुशियों के फूलों से महके आँगन तुम्हारा,
सफलता के आसमान में चमके नाम तुम्हारा।
गम की परछाईं कभी पास न आए,
खुशियों से भरा रहे हर साल तुम्हारा।

दुआ है कि कामयाबी के हर शिखर पर हो नाम तुम्हारा,
तुम्हारे हर कदम पर दुनिया का सलाम हो।
हिम्मत से हर मुश्किल का सामना करना तुम,
कि एक दिन वक्त भी तुम्हारा गुलाम हो।

साल बदलते रहेंगे, लेकिन हमारी दोस्ती कभी नहीं बदलेगी। वक्त की आंधियाँ आएँगी, मौसम बदलेंगे, परिस्थितियाँ भी बदलेंगी, पर हमारी दोस्ती का विश्वास हमेशा अडिग रहेगा। रब से बस यही दुआ है कि तेरी जिंदगी खुशियों के उजाले से हमेशा रोशन रहे।

कहते हैं कि हर रिश्ता खून से नहीं जुड़ता, कुछ रिश्ते दिल से बनते हैं और वही सबसे अनमोल होते हैं। मेरे जीवन में भी एक ऐसा ही रिश्ता है, जिसका नाम है अंजना।

हमारी दोस्ती बहुत पुरानी नहीं है। सात-आठ वर्षों का यह साथ शायद समय की दृष्टि से छोटा लगे, लेकिन इन वर्षों में जो अपनापन, विश्वास, सम्मान और स्नेह हमने पाया है, वह कई जन्मों के रिश्तों से भी गहरा है।

अंजना केवल मेरी सहेली नहीं, बल्कि मेरी हमराज़ है। मेरी हर खुशी, हर दुख, हर छोटी-बड़ी बात सबसे पहले उसी तक पहुँचती है। वह भी अपनी हर भावना सबसे पहले मुझसे साझा करती है। शायद यही सच्ची दोस्ती की पहचान होती है—जहाँ शब्दों से पहले एहसास समझ लिए जाते हैं।

आज के बदलते दौर में लोगों के बीच कैसे सहज रहना है, रिश्तों को कैसे निभाना है और हर परिस्थिति में मुस्कुराकर आगे कैसे बढ़ना है—यह मैंने उसी से सीखा है। उसका अपनापन इतना सहज है कि कहीं भी जाना हो तो उसका फोन आ जाता है. “मैं आपको लेने आ रही हूँ, आप तैयार हो जाइए।” यह एक साधारण-सा वाक्य नहीं, बल्कि उसके स्नेह और जिम्मेदारी का परिचय है।

उसके साथ बिताए पल मेरे जीवन की सबसे सुंदर यादों में शामिल हैं। साथ हँसना, गुनगुनाना, कभी बिना कुछ कहे एक-दूसरे की उदासी समझ लेना और जरूरत पड़ने पर बिना बुलाए साथ खड़े हो जाना. यही हमारी दोस्ती की सबसे बड़ी पूँजी है।

कभी-कभी सोचती हूँ कि मेरे जीवन में अंजना क्या है? तब केवल एक ही शब्द मन में आता है कस्तूरी। जिसकी खुशबू दिखाई नहीं देती, लेकिन हर पल महसूस होती है। ठीक वैसे ही जैसे उसका साथ मेरे जीवन को महकाता रहता है।हमारी दोस्ती पर यह गीत बिल्कुल सटीक बैठता है-

“तेरे जैसा यार कहाँ,
कहाँ ऐसा याराना।
याद करेगी दुनिया,
तेरा-मेरा अफ़साना।”

ईश्वर से मेरी बस यही प्रार्थना है कि हमारी दोस्ती यूँ ही मुस्कुराती रहे, समय के हर इम्तिहान में और मजबूत होती जाए, और जीवन की हर राह पर हम एक-दूसरे का हाथ थामे चलते रहें।

ना खून का कोई रिश्ता,
ना भाग्य का कोई बंधन।
जीवन की इस राह में,
फिर भी तुमसे मिला अपनापन।

अंजना और अर्चना की दोस्ती 
यही मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत पूँजी है।

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