gulmohar
दो महिला मित्र मुस्कुराते हुए साथ चलती हुई

मेरी कस्तूरी-सी दोस्त-अंजना

हर किसी के जीवन में एक ऐसा दोस्त जरूर होता है, जो खून के रिश्ते से नहीं, बल्कि दिल के रिश्ते से जुड़ा होता है। अंजना और अर्चना की यह कहानी भी ऐसे ही अटूट विश्वास, स्नेह और अपनत्व की मिसाल है। सात-आठ वर्षों की दोस्ती ने दोनों को एक-दूसरे का हमराज़, सहारा और परिवार बना दिया। फ्रेंडशिप डे पर प्रस्तुत यह भावनात्मक संस्मरण बताता है कि सच्ची दोस्ती समय की मोहताज नहीं होती, बल्कि विश्वास, सम्मान और साथ निभाने से अमर बनती है।

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ग़ज़ल

यह बात ज़ात-पात की नहीं, सोच और नज़रिया की है।हर बात की तह में जाने की आदत कभी फ़ायदा देती है, कभी सुकरात की तरह जान भी ले लेती है।
चींटी की कहानी सिखाती है कि औक़ात जानकर, शांत रहकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमानी है। बच्चों को भी यही समझ देना चाहिए कि हर अनजानी बात पर भरोसा न करें।

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