मेरी कस्तूरी-सी दोस्त-अंजना
हर किसी के जीवन में एक ऐसा दोस्त जरूर होता है, जो खून के रिश्ते से नहीं, बल्कि दिल के रिश्ते से जुड़ा होता है। अंजना और अर्चना की यह कहानी भी ऐसे ही अटूट विश्वास, स्नेह और अपनत्व की मिसाल है। सात-आठ वर्षों की दोस्ती ने दोनों को एक-दूसरे का हमराज़, सहारा और परिवार बना दिया। फ्रेंडशिप डे पर प्रस्तुत यह भावनात्मक संस्मरण बताता है कि सच्ची दोस्ती समय की मोहताज नहीं होती, बल्कि विश्वास, सम्मान और साथ निभाने से अमर बनती है।
