भारत के मानचित्र और उगते सूर्य की प्रतीकात्मक कलात्मक छवि

क्या होगा भारत देश का ?

वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर प्रश्न उठाती यह ओजपूर्ण हिंदी कविता भारत के भविष्य को लेकर कवयित्री की चिंता और भावनाओं को अभिव्यक्त करती है। कविता में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक परिवर्तनों पर चिंतन करते हुए भगवान राम से प्रतीकात्मक संवाद के माध्यम से अनेक सवाल पूछे गए हैं। यह रचना पाठकों को आत्ममंथन और विचार के लिए प्रेरित करती है।

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राष्ट्रभक्ति और मानवता का संदेश देता हिंदी प्रणय गीत

प्रणय गीत

यह गीत प्रेम की अभिव्यक्ति से पहले राष्ट्र, मानवता और एकता को सर्वोच्च स्थान देता है। समाज में बढ़ती घृणा, विघटन और चुनौतियों के बीच यह रचना प्रेम से अधिक कर्तव्य, समर्पण और राष्ट्रीय चेतना का प्रभावशाली संदेश देती है।

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उगते सूरज की रोशनी में आत्मगौरव और राष्ट्रप्रेम के भाव के साथ आगे बढ़ते लोगों का प्रेरक दृश्य, देशभक्ति हिंदी कविता का प्रतीकात्मक चित्र।

आत्मगौरव

आत्मगौरव, राष्ट्रभक्ति और मानव कल्याण के भावों से सजी यह हिंदी कविता देश की शक्ति, संस्कृति और विश्व कल्याण के संकल्प को प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती है।

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भारतीय तिरंगे के साथ खड़ा एक जागरूक युवा, पीछे सोलर ऊर्जा, भारतीय पहाड़, रेगिस्तान और शहर का दृश्य।

देश संग खड़े रहो

“जब देश कठिन दौर से गुजरता है, तब छोटी-छोटी बचत भी बड़ा योगदान बन जाती है।
यह कविता एकजुटता, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की प्रेरक आवाज़ है।”

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पटना से ब्रिटेन तक: 200 साल पहले एक भारतीय ने दुनिया को दिया ‘शैम्पू’ शब्द

200 साल पहले एक भारतीय ने दुनिया को दिया ‘शैम्पू’ शब्द

आज बाथरूम में रखी शैम्पू की बोतल एक आम चीज़ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शब्द और इसकी शुरुआत के पीछे एक भारतीय का हाथ है? 19वीं सदी में पटना के रहने वाले साके डीन महोमद ने न सिर्फ ब्रिटेन में भारतीय मसाज थेरेपी को लोकप्रिय बनाया, बल्कि अंग्रेजी भाषा को ‘शैम्पू’ जैसा शब्द भी दिया।

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"Young men and women celebrating New Year’s Eve at a hotel lawn in India, dressed in party clothes under colorful lights, with a festive yet chaotic atmosphere reflecting modern urban nightlife."

ज़ीरो नाइट

हर साल शहरों के होटलों में ज़ीरो नाइट भव्यता से मनाई जाती है, लेकिन इस बार युवा लड़कियों ने नशे में अपनी मर्यादा खो दी। नशे और तेज़ गाड़ी के कारण कई दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें परिवारों की खुशियाँ भी मिट गईं। यह घटनाएँ समाज और संस्कृति पर प्रश्न खड़े करती हैं।

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मन से मंच तक : कवयित्रियों के संगम से महका साहित्य जगत

महिला काव्य मंच का अष्टम अंतरराष्ट्रीय वार्षिकोत्सव, मुंबई में 21 दिसंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। देश-विदेश की 25 इकाइयों की कवयित्रियों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पुस्तकों का लोकार्पण, ‘मकाम’ ध्येय गीत की प्रस्तुति और 50 से अधिक कवयित्रियों का काव्य पाठ शामिल था। महाराष्ट्र इकाई को सर्वोत्तम प्रदेश इकाई सम्मान 2024 से नवाजा गया।

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जब सवाल कपड़ों का नहीं, मानसिकता का हो

भारत में बलात्कार की घटनाएँ हर उम्र और वर्ग को प्रभावित कर रही हैं छोटी बच्चियाँ, किशोर, महिलाएँ और यहाँ तक कि पुरुष भी शिकार बन रहे हैं। यह केवल शरीर का नहीं, मानसिकता का अपराध है। समाधान क़ानून के साथ-साथ शिक्षा, संवेदनशीलता और समाजिक चेतना में निहित है।

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विश्वभर में मनाया गया इंटरनेशनल मीटलेस डे

साधु वासवानी की 146वीं जयंती पर करुणा और शाकाहारी संदेश का उत्सव पुणे से सुरेश परिहार की रिपोर्ट करुणा, शांति और शाकाहारी जीवनशैली के संदेश को समर्पित इंटरनेशनल मीटलेस डे इस वर्ष भी वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर मनाया गया। गुरुदेव साधु टी. एल. वासवानी की 146वीं जयंती के अवसर पर दुनियाभर में आध्यात्मिक…

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किसको ढोओगे

कविता सत्ता, समाज और मानवता पर गहरा प्रश्न उठाती है। कवि पूछता है. आखिर तुम किसे अपने कंधों पर उठाओगे, किसे बचाओगे? जब नैया मझधार में डूबेगी, तब कौन किसे पार लगाएगा? सत्ता की लालसा में जो सबको मिटा देने की सोच है, वही अंततः विनाश का कारण बनेगी। भारत की धरती हर धर्म, हर जाति का आंचल है. यहाँ कीचड़ में भी कमल खिलता है। लेकिन जब राजनीति भाजन का रूप लेती है, तब वही ताक़त अपने ही हाथों से हार जाती है। गरीब, सच्चे, उज्जवल मन वाले लोग पूछते हैं. क्या हर चुनाव में बस हम पर ही डोरे डालोगे, क्या सबको साथ में मारोगे?

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