यूट्यूब और सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लील सामग्री के दुष्प्रभाव तथा भारतीय समाज और संस्कारों पर उसके प्रभाव का प्रतीकात्मक दृश्य।

बेशर्मी का बाज़ार

यूट्यूब और सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लील सामग्री के बीच भारतीय संस्कार, पारिवारिक मूल्य और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर सामाजिक प्रश्नों पर यह लेख चिंता व्यक्त करता है। क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर परोसी जा रही गंदगी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए खतरा बनती जा रही है?

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हरसिंगार: वह फूल जो गिरकर भी महकना नहीं छोड़ता |

हरसिंगार: वह फूल जो गिरकर भी महकना नहीं छोड़ता

रात में खिलने और सुबह धरती पर बिखर जाने वाला हरसिंगार केवल एक फूल नहीं, बल्कि जीवन का गहरा संदेश है। यह सिखाता है कि जीवन की सुंदरता उसकी अवधि में नहीं, बल्कि उसके द्वारा छोड़ी गई खुशबू और प्रभाव में होती है।

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अलमारी में टंगे रंग-बिरंगे लेहंगे को देखती एक भारतीय महिला, शादी और पारिवारिक यादों में खोई हुई, भावनात्मक और यथार्थवादी दृश्य।

रिश्ते

खुश्बू गोयल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) वो लेहंगा, जो भैया की शादी में लिया था,उसकी भी बड़ी अजीब कहानी है। जब भी अलमारी खोलूँ,माँ को बस वही नज़र आता है,और हर बार की तरहउनका कहना शुरू हो जाता है “इतना भारी लेहंगा क्यों लिया था,जब तुझे पहनना ही नहीं था?” बस एक बार भैया की शादी…

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नारी शक्ति, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाती प्रेरक हिंदी कविता की यथार्थवादी छवि।

“नारी केवल देह नहीं”

नारी केवल देह नहीं” नारी के अस्तित्व, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक गौरव पर आधारित एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है। यह रचना नारी को केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि त्याग, ममता, शक्ति और संस्कृति की वाहक के रूप में देखने का संदेश देती है।

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विदेश में खड़ी एक भारतीय महिला अपने वतन को याद करते हुए भावुक दिखाई दे रही है

विदेश में वतन की याद

विदेश की ठंडी हवाओं में भी दिल अपने वतन की खुशबू खोजता रहता है। यह कविता परदेस में रहकर भारत और अपनों की यादों को महसूस करने वाले हर भारतीय की भावनाओं को शब्द देती है।

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कृष्ण के अनेक रूप: भक्ति कविता

रूप एक नाम अनेक

यह कविता भगवान कृष्ण के अनेक दिव्य रूपों और लीलाओं का भावपूर्ण चित्रण करती है, जिसमें बाल्यकाल की नटखटता से लेकर धर्म और कर्म का उपदेश देने वाले सारथी रूप तक उनकी अनंत महिमा को दर्शाया गया है.

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अक्षय तृतीया पर सेवा का अनोखा उदाहरण

अक्षय तृतीया पर सेवा, संस्कार और उत्सव का संगम

कांठेड़ परिवार ने अक्षय तृतीया पर गौशाला में सेवा कर जन्मदिन और व्यवसाय की वर्षगांठ को खास अंदाज में मनाकर समाज को प्रेरणादायक संदेश दिया।

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नानी के घर की छुट्टियां—बचपन की सबसे खूबसूरत यादें

वो जो छुट्टियां थीं

“वो जो छुट्टियां थीं” एक भावनात्मक और नॉस्टेल्जिक लेख है, जो हमें सीधे बचपन की उन सुनहरी यादों में ले जाता है, जहाँ नानी का घर हर खुशी का केंद्र हुआ करता था। यह रचना केवल छुट्टियों का वर्णन नहीं, बल्कि उस दौर की सादगी, अपनापन और पारिवारिक जुड़ाव की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है।

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द्रौपदी–कृष्ण संवाद: “विश्वास का वस्त्र

द्रौपदी–कृष्ण संवाद

द्रौपदी और श्रीकृष्ण के बीच यह संवाद “विश्वास का वस्त्र” महाभारत की उस पीड़ा को उजागर करता है, जहाँ नारी अस्मिता पर प्रश्न उठे। यह रचना विश्वास, धर्म, और नारी सम्मान के गहरे अर्थ को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।

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भारतीय संस्कृति में नारी का महत्व और नारी शक्ति को दर्शाता प्रेरक लेख

नारी: सृजन, शक्ति और साहस का अद्भुत संगम

भारतीय संस्कृति में नारी को सदा से देवी का स्वरूप माना गया है। यह लेख नारी की शक्ति, त्याग, ममता और साहस को दर्शाता है और बताता है कि नारी कभी भी कमजोर नहीं रही। नारी सृष्टि की आधारशिला है और हर रूप में सम्माननीय है।

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