“क्यों टूट रहे हैं रिश्ते?

“आधुनिक जीवन की भागदौड़, अहंकार, संवाद की कमी और संस्कारों से दूर होती नई पीढ़ी इन सबने विवाह जैसे पवित्र बंधन को कमजोर कर दिया है। परिवार का ताना-बाना बिखर रहा है, संयुक्त परिवार टूट चुके हैं और रिश्तों में धैर्य व समझदारी कम होती जा रही है। यही कारण है कि विवाह-विच्छेद बढ़ते जा रहे हैं।”

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संस्कृत – सभी भाषाओं की जननी

संस्कृत भारती संस्था के कोंकण प्रांत के मार्वे-दिंडोशी जनपद की ओर से मुंबई के मलाड (सुन्दर नगर) में १० दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर ६ अक्टूबर से १५ अक्टूबर तक चला, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग, जाति एवं धर्म के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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सुहाग पर्व करवा चौथ

यह कविता भारतीय विवाहिता की भावनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है। माता-पिता से विदा होकर नए घर में प्रवेश, पति के प्रति समर्पण और सुहागन होने का गौरव इसमें प्रमुख हैं। सोलह श्रृंगार, लाल चुनरी, मांग टीका, मेहंदी, पायल, चूड़ियाँ और मंगलसूत्र जैसे आभूषण उसकी पारंपरिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान को उजागर करते हैं। कविता में करवाचौथ व्रत और चौथ माता से अखंड सुहाग की कामना का भी उल्लेख है। यह अंश स्त्री के नए गृह जीवन, आशाओं और प्रेम भरे संबंधों की महत्ता को भावपूर्ण रूप से व्यक्त करता है।

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रूठे पिया

करवा चौथ की तैयारियों के बीच मन में अजीब सी उदासी थी। रवि की नाराज़गी ने त्योहार की सारी चमक जैसे बुझा दी थी। मैंने उनकी पसंद का खाना बनाकर उसमें “सॉरी” का कार्ड छुपा दिया, उम्मीद थी कि वे मुस्कुराएँगे, कॉल करेंगे — पर सन्नाटा ही जवाब बना रहा। शाम ढली तो आँसू ढलक पड़े। तभी दरवाज़े की घंटी बजी — सामने रवि थे, मुस्कराते हुए। बिना कुछ कहे उन्होंने मुझे बाँहों में भर लिया।

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भजन : हे माता कहो क्या त्रुटि हुई

इस भजन में एक भक्त अपनी माता से प्रकट पश्चाताप और सवाल उठाता है — “हे माता, कहो क्या त्रुटि हुई, मुझसे हुआ क्या पाप?” वह दिन-रात माता की सेवा में लगा रहता है, अपने स्वाभिमान और कर्तव्य के बीच उलझा हुआ। भजन में पत्नी की असहायता, आत्म-संदेह और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का मिश्रण दिखाई देता है। हर पंक्ति में उसके हृदय की पीड़ा, पछतावा और भक्ति स्पष्ट है, जबकि माता और देवताओं के प्रति उसका समर्पण उसकी आस्था को उजागर करता है। यह भजन पश्चाताप और विश्वास के बीच की संवेदनशील यात्रा का प्रतीक है।

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हिंदी साहित्य भारती : राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ का गठन

हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित अंतरराष्ट्रीय संस्था हिंदी साहित्य भारती ने मुंबई, महाराष्ट्र में राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ की नई इकाई का गठन किया।

कार्यक्रम का आयोजन द प्रेसीडेंसी रेडियो क्लब में किया गया, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती संजना लाल ने की। महानगर कोलकाता से पधारी डॉ. सुनीता मंडल, अध्यक्ष, हिंदी साहित्य भारती राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ, ने सभी साहित्यकारों और कवयित्रियों का स्वागत करते हुए महिला प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली और उद्देश्यों को साझा किया।

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

श्रीराम को केवल एक राजा या नायक के रूप में नहीं, बल्कि आदर्श और जीवन-दर्शन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिनमें मन रमा रहे, जिन्हें हमने कभी गुना नहीं, जो समय के शिलालेख पर पावन धाम हैं — वही राम हैं। उनकी मर्यादित कर्त्तव्य-बोध और कूटनीति की सूक्ष्म समझ, जीवन के रण में उनकी जीत और हार, सागर पर उनका साहस, प्रेम और त्याग — सब उन्हें न केवल नायक बल्कि नयनाभिराम बनाते हैं। उनके कार्य और आचरण हमारे जीवन में संजीवनी और अनमोल निधि की तरह हैं।

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भारतीय साहित्य संकल्पना और वैश्विक प्रभाव पर मंथन

विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, उज्जैन द्वारा मराठा मंदिर साहित्य शाखा, मुंबई एवं विश्व हिन्दी प्रचार प्रसार संस्थान, पुणे के सहयोग से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संचेतना महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर “भारतीय साहित्य : संकल्पना और वैश्विक प्रभाव” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि श्री सुरेश चंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नॉर्वे) और मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा (उज्जैन) सहित देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने भाग लिया। संगोष्ठी में भारतीय साहित्य की वैश्विक भूमिका, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। शाम को हुए कवि सम्मेलन में भारत, अमेरिका और नॉर्वे के कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन साहित्यिक आदान-प्रदान, भारतीय विचारधारा और विश्व शांति के संदेश को समर्पित रहा।

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प्रेम में हो चले हैं हम दोनों थोड़े मूक और बधिर: अंजू सुंदर

लखनऊ से डॉ. अनुराधा पांडेय की रिपोर्ट लखनऊ– महिला काव्य मंच (मध्य) की लखनऊ इकाई की मासिक काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया।मुख्य अतिथि रहीं बिहार से लेखिका एवं संपादक प्रीति सिन्हा तथा विशिष्ट अतिथि रहीं उपाध्यक्ष प. रांची जि.इ./पू. सिंहभूम जि.इ. जमशेदपुर (संरक्षक) रिम्मी वर्मा। गोष्ठी का आरम्भ डॉ. राजेश कुमारी, राष्ट्रीय अध्यक्ष,…

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ज्ञान परंपरा और भूगोल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में “भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेष संदर्भ में भूगोल विषय” पर केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर अर्पण भारद्वाज के निर्देशन में कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में भूगोल विषय के पाठ्यक्रम निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करना है।

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