साहित्य ग़ज़ल LIVE WIRE NEWS NETWORK6 months ago6 months ago01 mins कलम जब तलवार बन जाए, तब ग़ज़ल सिर्फ़ इश्क़ नहीं करती… सच भी कहती है।यह ग़ज़ल खुद्दारी, संघर्ष, साहित्य की सियासत और मोहब्बत के बदलते मायनों पर तीखा लेकिन संवेदनशील प्रहार करती है।” Read More