बाद तेरे कभी किसी को भी…
बाद तेरे कभी किसी को भी अहमियत दी न ज़िंदगी को भी… प्रेम, विरह और यादों के एहसास से बुनी यह ग़ज़ल रिश्तों की गहराई और मन की खामोशी को शब्द देती है।

बाद तेरे कभी किसी को भी अहमियत दी न ज़िंदगी को भी… प्रेम, विरह और यादों के एहसास से बुनी यह ग़ज़ल रिश्तों की गहराई और मन की खामोशी को शब्द देती है।