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बाद तेरे कभी किसी को भी हिंदी ग़ज़ल

बाद तेरे कभी किसी को भी…

बाद तेरे कभी किसी को भी अहमियत दी न ज़िंदगी को भी… प्रेम, विरह और यादों के एहसास से बुनी यह ग़ज़ल रिश्तों की गहराई और मन की खामोशी को शब्द देती है।

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