1 सितंबर से पर्यटकों के लिए खुलेगा, नई सुविधाओं से सजेगा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
तीन नए व्यू-पॉइंट, लेटराइट पत्थरों की पगडंडियां और महिलाओं के लिए हिरकणी कक्ष जैसी सुविधाएं

सुरेश परिहार, पुणे
सातारा के सुरम्य कास पठार पर एक बार फिर रंगों की बहार लौटने वाली है. मौसमी फूलों की अद्भुत विविधता के लिए प्रसिद्ध और यूनेस्को विश्व धरोहर जैव-विविधता स्थल के रूप में पहचान रखने वाला कास पठार 1 सितंबर से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा. इस बार यहां आने वाले सैलानियों को बेहतर सुविधाओं के साथ प्रकृति के और करीब जाने का अनुभव मिलेगा. वहीं, संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं.
हर साल बारिश के बाद कास पठार पर हजारों रंगों के छोटे-छोटे फूल खिल उठते हैं और पूरा पठार किसी विशाल प्राकृतिक चित्र की तरह नजर आने लगता है. इसी फूलों के मौसम को देखते हुए सातारा वन विभाग ने कास संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सहयोग से पर्यटकों के लिए कई नई सुविधाएं विकसित की हैं.
इनमें तीन नए व्यू-पॉइंट, लेटराइट पत्थरों से बनाई गई पगडंडियां, स्मृति वस्तुओं की दुकान, ढका हुआ प्रतीक्षालय, महिलाओं के लिए विशेष हिरकणी कक्ष और चेंजिंग रूम शामिल हैं. नए व्यू-पॉइंट में मंडपघळ भी शामिल है. इनसे पर्यटकों को पठार के कुछ नए और मनोरम हिस्सों को देखने का अवसर मिलेगा. साथ ही, पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित करने में वन विभाग को भी मदद मिलेगी.
फूलों की नाजुक दुनिया को बचाने वाली पगडंडियां
कास पठार की खूबसूरती जितनी आकर्षक है, उसका पारिस्थितिकी तंत्र उतना ही नाजुक भी है. यहां खिलने वाले मौसमी फूलों और वनस्पतियों को पर्यटकों की भीड़ से नुकसान न पहुंचे, इसके लिए निर्धारित पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए लेटराइट पत्थरों की पगडंडियां तैयार की गई हैं.
इन पगडंडियों का उद्देश्य पर्यटकों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के साथ फूलों और नाजुक वनस्पतियों पर अनजाने में पैर पड़ने से रोकना है. यानी अब पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी ले सकेंगे और उसे सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका भी निभा सकेंगे.
परिवारों और महिलाओं के लिए भी बेहतर सुविधाएं
पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक ढका हुआ प्रतीक्षालय भी तैयार किया गया है. भीड़ बढ़ने के दौरान या खराब मौसम में पर्यटक यहां आराम से इंतजार कर सकेंगे.
महिलाओं के लिए विशेष हिरकणी कक्ष और चेंजिंग रूम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है. इससे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों और महिला पर्यटकों के लिए कास की यात्रा अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है.
चाय अब मिट्टी के कुल्हड़ में
कास की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के लिए इस बार पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है. प्लास्टिक कचरे को कम करने के उद्देश्य से पर्यटन क्षेत्र में चाय अब प्लास्टिक के कपों के बजाय पारंपरिक मिट्टी के कुल्हड़ों में परोसी जाएगी.
फूलों का मौसम, बढ़ेगी पर्यटकों की संख्या
फूलों के खिलने के मौसम में कास पठार महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है. बारिश के बाद जब पूरा पठार रंग-बिरंगे फूलों से ढक जाता है, तब यहां का नजारा किसी जीवंत पेंटिंग जैसा दिखाई देता है.
इस वर्ष भी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए वन विभाग का जोर पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर है. पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित करने से लेकर निर्धारित मार्गों तक सीमित रखने तक, हर कदम का उद्देश्य कास की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है.
1 सितंबर से शुरू होगी नई फूलों की ऋतु
नई सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण के उपायों के साथ कास पठार 1 सितंबर से पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. प्रकृति, फूलों और पहाड़ी नजारों का आनंद लेने वालों के लिए यह मौसम कास की यात्रा का सबसे खूबसूरत समय माना जाता है. इस बार यहां का अनुभव केवल फूलों की खूबसूरती देखने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि प्रकृति को करीब से महसूस करने और उसे बचाने की जिम्मेदारी समझने का अवसर भी देगा.
