गन्ना किसान मिलों को गन्ना देने के बजाय गुड़-शक्कर क्यों बना रहे हैं ?
चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है. सहारनपुर में महज 8 से 10 दिनों में चीनी का भाव 45 रुपये से बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. खास बात यह है कि महंगाई का असर केवल चीनी तक सीमित नहीं है, बल्कि गन्ने से बनने वाले गुड़ और शक्कर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है.
सहारनपुर के बेहट क्षेत्र के कोठड़ी बहलोलपुर गांव निवासी किसान संजय चौहान के अनुसार, गन्ने की पैदावार में बड़ी कमी नहीं आई है, लेकिन किसानों का मिलों से मोहभंग जरूर हुआ है. किसानों को गन्ना मिलों में पहुंचाने के बाद भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. कई मामलों में भुगतान एक से दो साल तक अटका रहता है. ऐसे में किसान ऐसी फसल की खेती करने से बच रहे हैं, जिसमें पैसा लंबे समय तक फंसा रहे.
संजय चौहान ने बताया कि उन्होंने करीब आठ वर्ष पहले चीनी मिलों को गन्ना देना बंद कर दिया था. अब वे गन्ने से गुड़ और शक्कर तैयार करते हैं. उनका कहना है कि इससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने के साथ भुगतान भी तुरंत प्राप्त हो जाता है.
उन्होंने बताया कि पहले शक्कर 120 रुपये और गुड़ 140 रुपये प्रति किलो बिकता था, जो अब बढ़कर क्रमशः 150 और 170 रुपये प्रति किलो हो गया है. उनके अनुसार, उनके उत्पाद ज्यादातर जैविक होते हैं और इनके निर्माण में रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता.
किसान का कहना है कि यदि चीनी मिलों में भुगतान की स्थिति नहीं सुधरी और चीनी के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो आने वाले त्योहारों में गुड़ और शक्कर की कीमतें भी और बढ़ सकती हैं.
