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प्रीति गुप्ता: सेवा को बनाया संकल्प, बेटियों को दी उड़ान

प्रीति गुप्ता महिला सशक्तिकरण और समाजसेवा के कार्यों के दौरान

15 वर्षों से मानवता, महिला सशक्तिकरण और सेवा में जुटी प्रेरक शख्सियत

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे

कुछ लोग अपने लिए जीते हैं, कुछ अपने परिवार के लिए और कुछ ऐसे होते हैं, जिनके जीवन का दायरा परिवार से निकलकर समाज तक फैल जाता है. प्रीति गुप्ता ऐसी ही शख्सियत हैं, जिन्होंने सेवा को केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि अपने जीवन का संकल्प बनाया है. विंध्य क्षेत्र की पावन धरती से शुरू हुआ प्रीति गुप्ता का सेवा सफर आज हजारों जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन चुका है. बचपन से मिले समाजसेवा के संस्कारों को उन्होंने अपने जीवन में उतारा और शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण तथा जरूरतमंदों की सहायता को अपने कार्यों का आधार बनाया. परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी उन्होंने कभी नजरअंदाज नहीं किया. पिछले 15 वर्षों से जरूरतमंदों तक राशन, भोजन, शिक्षा सामग्री और आवश्यक सहयोग पहुंचाने का उनका सिलसिला लगातार जारी है.
शिक्षा को बनाया बदलाव का माध्यम

प्रीति गुप्ता का मानना है कि किसी जरूरतमंद को तत्काल सहायता देना जरूरी है, लेकिन उसे आत्मनिर्भर बनाने का सबसे मजबूत रास्ता शिक्षा है. इसी सोच के साथ उन्होंने “उड़ान वेलफेयर फाउंडेशन” के माध्यम से हजारों बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया. आंगनबाड़ी केंद्रों और वनवासी विद्यालयों को गोद लेकर उनके विकास में सहयोग किया गया. बच्चों को शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराने से लेकर उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने तक, संस्था के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी प्रीति गुप्ता की सक्रियता उल्लेखनीय रही है. स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के साथ कैंसर जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने और समय पर स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

प्रीति गुप्ता के लिए नारी सशक्तिकरण केवल एक शब्द या मंच से दिया जाने वाला संदेश नहीं है. यह उनके सामाजिक कार्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.उनका मानना है कि किसी बेटी को केवल सहायता देना पर्याप्त नहीं है. उसे शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर इतना सक्षम बनाना जरूरी है कि वह अपने जीवन के फैसले खुद ले सके. इसी सोच के साथ 11 हजार से अधिक बालिकाओं को सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण दिया जा चुका है. महिलाओं की काउंसलिंग में सहयोग कर उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी कार्य किया गया है.
जरूरतमंद बेटियों के लिए विवाह का सहारा

इस वर्ष 20 अप्रैल को प्रीति गुप्ता के प्रयासों से 12 जरूरतमंद बेटियों का सामूहिक विवाह गौशाला परिसर में आयोजित किया गया. इसके अलावा 100 से अधिक बेटियों के कन्या विवाह में भी सहयोग किया गया. इन प्रयासों का उद्देश्य केवल विवाह संपन्न कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंद बेटियों को सम्मान, सुरक्षा और नए जीवन की शुरुआत का अवसर देना है. प्रीति गुप्ता की सोच में बेटी किसी की जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि समाज की संभावनाओं का भविष्य है. इसलिए उनका प्रयास है कि बेटियों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिले.
श्रमवीरों के साथ खड़ी रहीं प्रीति गुप्ता

समाजसेवा का अर्थ केवल बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं होता. कभी बारिश में दिया गया एक रेनकोट, गर्मी में पानी की बोतल या सर्दी में एक स्वेटर भी किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है.इसी संवेदनशील सोच के साथ जबलपुर शहर में रिक्शा चालकों और श्रमवीरों के लिए विशेष सेवा अभियान चलाए गए. बरसात के मौसम में रेनकोट वितरित किए गए. गर्मी के दिनों में पानी की बोतल, जूस, शरबत और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई. सर्दियों में सरकारी अस्पतालों में स्वेटर वितरण का कार्य किया गया. इन पहलों में प्रीति गुप्ता की उस सोच की झलक दिखाई देती है, जिसमें सेवा का अर्थ सामने वाले की वास्तविक जरूरत को समझना है.
इंसानों के साथ बेजुबानों की भी सेवा

प्रीति गुप्ता की सेवा यात्रा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है. उनकी गौशाला में असहाय, दुर्घटनाग्रस्त और सड़कों पर छोड़ दी गई गायों की सेवा, उपचार और संरक्षण किया जाता है.गौशाला उनके लिए केवल पशुओं के संरक्षण का स्थान नहीं, बल्कि संवेदना और सेवा की भावना का विस्तार है. असहाय जीवों के प्रति जिम्मेदारी का यह भाव उनके सामाजिक कार्यों को एक अलग आयाम देता है.
कोरोना काल में भी नहीं रुके सेवा के कदम

कोरोना महामारी का दौर समाज के लिए बेहद कठिन था. ऐसे समय में भी प्रीति गुप्ता और उनकी संस्था ने जरूरतमंदों की सहायता के प्रयास जारी रखे. ब्लड डोनेशन और प्लाज्मा सेवा जैसे कार्यों के लिए उन्हें केंद्रीय मंत्री भारत सरकार के माननीय श्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा सम्मानित किया गया. कोरोना काल में जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित सहयोगकर्ताओं की पुस्तक में “उड़ान वेलफेयर फाउंडेशन” का नाम भी शामिल किया गया.एक ही वर्ष में कलेक्टर द्वारा दो बार सम्मानित किया जाना भी उनके सामाजिक कार्यों की निरंतरता और प्रभाव को दर्शाता है.
सम्मान मिले, लेकिन सेवा का सफर जारी रहा

सामाजिक कार्यों और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रीति गुप्ता को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मान प्राप्त हुए .छत्तीसगढ़ की तत्कालीन राज्यपाल श्रीमती अनुसुइया उइके द्वारा नेहरू युवा केंद्र, भोपाल में उन्हें सम्मानित किया गया.महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए दिल्ली में 15 देशों के बीच “The Most Inspiring Women of the Earth” पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया गया.15 अगस्त के अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री राकेश सिंह द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें सम्मान प्राप्त हुआ. इसके अतिरिक्त प्रीति गुप्ता को कई अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है. लेकिन उपलब्धियों और सम्मानों के बावजूद प्रीति गुप्ता के लिए सेवा का अर्थ पुरस्कार प्राप्त करना नहीं है. उनके लिए किसी जरूरतमंद के चेहरे पर आई मुस्कान ही सबसे बड़ा सम्मान है.
सेवा से बदलाव तक का सफर

प्रीति गुप्ता की कहानी केवल एक महिला की व्यक्तिगत उपलब्धियों की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जिसमें अपने लिए आगे बढ़ने के साथ-साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है.पिछले 15 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, श्रमिकों की सहायता, जरूरतमंदों के सहयोग और गौसेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्य इसी सोच का विस्तार हैं. उनका संकल्प स्पष्ट है-
हर बेटी को सम्मान और आत्मनिर्भरता मिले.
हर जरूरतमंद को सहारा मिले.
हर श्रमिक के जीवन में सहयोग पहुंचे.
हर जीव के प्रति संवेदना बनी रहे.
और समाज स्वच्छ, हरित एवं जागरूक बने.

“नारी सशक्तिकरण” नहीं, एक सतत आंदोलन

प्रीति गुप्ता मानती हैं कि नारी सशक्तिकरण केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाला आंदोलन है. किसी बेटी को आगे बढ़ने का अवसर देना केवल उसके वर्तमान को बदलना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बेहतर बनाना भी है. उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि बदलाव हमेशा बड़े मंचों से नहीं आता. कई बार बदलाव एक छोटी-सी मदद, किसी बच्चे के हाथ में दी गई किताब, किसी बेटी को दिया गया आत्मरक्षा का प्रशिक्षण, किसी जरूरतमंद परिवार की मदद या किसी असहाय जीव की सेवा से शुरू होता है. विंध्य क्षेत्र की धरती से शुरू हुआ प्रीति गुप्ता का यह सेवा सफर आज अनेक लोगों के जीवन को छू रहा है.

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