अब क्या होगा

तूफानी रात में घर के अंदर डरी हुई महिला फोन उठाते हुए, सस्पेंस भरा माहौल

भाग 1: तूफ़ानी रात में छिपा एक खौफनाक सच

रीता मिश्रा तिवारी , भागलपुर

पिछले साल भर से अपने दस वर्षीय बेटे को लेकर शेफाली बहुत परेशान थी। उसकी शक्ल-सूरत, चाल-ढाल और हाव-भाव से उसके मन में एक आशंका उत्पन्न हो रही थी। वह हर वक्त भयभीत रहती थी। बाहर मौसम बहुत खराब था। तूफ़ान अपने चरम पर था। तेज हवाएँ और मूसलाधार बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। दो दिन के सेमिनार के लिए रोहन बॉम्बे गया था।

तभी…
ज़ोर से बिजली कड़की और फ़ोन की घनघनाहट घर में गूंजने लगी।

घबराकर शेफाली बिस्तर पर उठ बैठी। बगल में सोए बेटे को एक नज़र देखा और मोबाइल में समय देखा रात के बारह बज रहे थे।

इस वक्त… इतनी रात गए कौन फोन कर सकता है? वो भी लैंडलाइन पर।
शायद रोहन का…? न… नहीं, वो तो मोबाइल…! फिर कौन…?

पसीना पोंछते, डरते कदमों से नीचे आकर शेफाली ने फ़ोन उठा लिया।

“मोबाइल क्यों ऑफ़ रखा है यार..?
पता है कितना परेशान हो गया था।
गोलू की चिंता हो रही थी।
कैसी तबीयत है अब उसकी..?
सुनो, बारिश के कारण फ्लाइट डिले हो गया है।
कल रात तक की संभावना है… अगर मौसम सही रहा तो…
क्या हुआ? कुछ बोल नहीं रही हो..?
तबीयत ठीक है न..?
कहीं गोलू…!”

“न… न… नहीं… हाँ-हाँ, सब ठीक है। दरअसल मैं सो गई थी।
बुखार उतर गया है गोलू का। पता है, आज तो अचार के साथ एक रोटी खाई है उसने।”

“अच्छी बात है, चलो ठीक है। रात बहुत हो गई है।
जाओ, सो जाओ… और हाँ, फोन ऑन रखा करो यार।
जानती हो, तुम लोगों से दूर नहीं रह सकता मैं!
बात कर लेता हूँ तो तसल्ली हो जाती है। चलो, बाय… गुड नाइट।”

फ़ोन डिस्कनेक्ट होते ही—
“उफ्फ… थैंक गॉड! मैं तो डर ही गई थी।”

धम्म से सोफे पर बैठ गई शेफाली।
“ओह… मैं भी न जाने क्या-क्या सोचती रहती हूँ।”

भर गिलास पानी पिया और कमरे में आकर लेट गई।
गोलू गहरी नींद में था।

प्यार से उसके माथे को सहलाकर एक बोसा अंकित किया और सोने का प्रयास करने लगी,
मगर नींद तो कोसों दूर जा चुकी थी।

बाहर तूफ़ान कुछ कम हुआ तो अंदर का तूफ़ान हिलोरे मारने लगा…
और अतीत के पन्ने फरफराने लगे।
यादों का एक पन्ना सामने खुल चुका था…

एक डर और आशंका से भरी प्रेम कहानी का दूसरा भाग शीघ्र ही…

लेखिका के बारे में-

रीता मिश्रा तिवारी
हिंदी साहित्य जगत की एक सशक्त और संवेदनशील रचनाकार हैं, जिनका जन्म 12 दिसंबर 1967 को बिहार के भागलपुर में हुआ। शिक्षिका के रूप में दीर्घकालीन सेवा के पश्चात आज वे सेवा निवृत्त होकर पूर्णतः साहित्य सृजन में समर्पित हैं। एम.ए. एवं बी.एड. शिक्षित रीता जी ने ज्ञान और संस्कारों का दीप जलाते हुए समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। कविता, कहानी, लघुकथा, हाइकु, संस्मरण और आलेख जैसी विविध विधाओं में उनकी लेखनी समान रूप से सशक्त और प्रभावशाली है। उनकी रचनाओं में जीवन की संवेदनाएँ, समाज की सच्चाइयाँ और मानवीय भावनाओं की गहराई स्पष्ट झलकती है। आकाशवाणी भागलपुर से उनके काव्य एवं कथा पाठ का नियमित प्रसारण उनकी साहित्यिक सक्रियता का प्रमाण है। उनकी प्रमुख कृतियों में “अविता” (एकल कहानी संग्रह) और “प्रेम लौटता है” (एकल काव्य संग्रह) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त वे अनेक प्रतिष्ठित साझा काव्य एवं कहानी संकलनों का हिस्सा रही हैं। देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं और ई-पत्रिकाओं में उनकी 300 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित होकर पाठकों के बीच सराही जा चुकी हैं। रीता मिश्रा तिवारी के लिए साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का सजीव दर्पण है, जिसमें जीवन के अनछुए पल, अनुभव और यथार्थ सजीव हो उठते हैं। उनकी लेखनी न केवल विचारों को झकझोरती है, बल्कि पाठकों के हृदय को भी गहराई से स्पर्श करती है।

3 thoughts on “अब क्या होगा

  1. कहानी रोचक है..👌 अगले भाग की प्रतीक्षा रहेगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *