ब्लैकवुड वैली

धुंध से घिरे जंगल में पुराना कुआँ और उसके आसपास खड़ी डरावनी आकृतियाँ

एक रोमाचंक हॉरर स्टोरी की तीसरा और अंतिम भाग

मौसमी चंद्रा

धीमी… फुसफुसाहट…
ऐसा लग रहा था जैसे कई लोग एक साथ बहुत पास खड़े होकर धीरे-धीरे कुछ कह रहे हों।
“वापस जाओ…” “छोड़ दो…” “यहीं रहो…”

सिर्फ आवाज़ें सुनाई दे रही थी…दिखाई कोई भी नहीं दे रहा था।
अजीब आवाजें थी कर्कश कोलाहल…. सीधे दिमाग की नसों में रेंगती हुई भीतर उतर रही थी!

एड्रियन ने सिर झटका, ज़ोर से-“ये हमारे दिमाग से खेल रहा है! समझे तुम लोग? ये… ये सच नहीं है!”
लेकिन उसकी अपनी आवाज़ में भी भरोसा नहीं था।

तभी…
सोफिया की उंगलियाँ काँपती हुई आगे उठी—
“वो देखो!”

सबकी नज़रें एक साथ मुड़ी!
पेड़ों के बीच… धुंध की परतों के पीछे कुछ आकृतियाँ खड़ी थी। धीरे-धीरे… वे साफ़ होने लगी!
वही परिवार!
वही… तस्वीर वाला परिवार…लेकिन इस बार… उनके चेहरे थे और उन चेहरों पर… कोई भाव नहीं था!
न डर,न क्रोध,
न जीवन जीने की ललक! सपाट चेहरे और बस…खालीपन!

उनकी आँखें सीधे पाँचों पर टिकी थी जैसे वे उन्हें पहचानते हों… बहुत पहले से!
एक कदम…फिर दूसरा…वे उनकी ओर बढ़ने लगे!

टहनियाँ टूटने की आवाज़ अब उनके कदमों के साथ ताल मिला रही थी!
चर्र… चर्र… चर्र…!

“भागो!” एड्रियन चीखा!
सबने भागना शुरू किया लेकिन जंगल… अब वैसा नहीं था!
हर दिशा एक जैसी,हर पेड़ एक जैसा,हर रास्ता… घूमफिरकर उसी जगह लौट आता!
मार्था ने पीछे मुड़कर देखा…वो आकृतियाँ अभी भी चल रही थी…धीरे… लेकिन लगातार! मानो वे जानती हो कि भागना व्यर्थ है।

“ये हमें जाने नहीं देगा!” एलियट हाँफते हुए बोला।

तभी…अचानक सारे पेड़ गायब हो गए! वे एक खुली जगह खड़े थे,बीच में… एक पुराना कुआँ और उसके चारों ओर… पत्थरों का घेरा।

ज़मीन पर अजीब-से चिन्ह उकेरे हुए थे घुमावदार… उलझे हुए किसी अन्य ही भाषा में!

हवा अचानक ठंडी हो गई!
“ये… वही गाँव है जिसके बारे में हमने किताब में पढ़ा था!” एलियट की आवाज़ धीमी पड़ गई।

एलियट झुककर पत्थरों को देखने लगा!
उसकी उंगलियाँ हल्के से उन निशानों को छू गई और तभी! एक झटका!
उसने हाथ तुरंत पीछे खींच लिया!

“ये… गर्म हैं!” वो फुसफुसाया।

“क्या?” ल्यूकस चौंका!

“जैसे… अभी-अभी किसी ने इन्हें बनाया हो…”

तभी पीछे से एक आवाज़ आई!
“तुम लोग… यहाँ क्यों आए?”

सब एक साथ मुड़े!
एक बूढ़ा आदमी…पतले, फटे कपड़े,चेहरा झुका हुआ और गहरी काली आँखें!
वह धीरे-धीरे उनके करीब आया!

“ये घाटी लोगों को बुलाती है और फिर…”
वह रुका!
हल्की मुस्कान उसके होंठों पर आई-“उन्हें अपने में समा लेती है।”

सोफिया एक कदम पीछे हटी।
“वो गाँव…जो गायब हो गया था?” एड्रियन ने हिम्मत करके पूछा।

बूढ़े ने सिर उठाया- “गायब नहीं हुआ था वो… बदल गया था।”

हवा का दबाव बढ़ने लगा था…

“जिंदा लोगों से भरा वो गांव बदल गया था मुर्दों के भरे पूरे जमात में! अब तुम लोग भी बदल जाओगे…”

और तभी उसका चेहरा… हिलने लगा ऐसा लगा त्वचा के नीचे कुछ रेंग रहा हो!
आँखें… धीरे-धीरे और काली पड़ने लगी मुँह असामान्य तरीके से फैल गया! मुस्कान एक दरार में बदलने लगी…

“भागो!” ल्यूकस चीखा लेकिन इस बार…कोई हिला नहीं क्योंकि चारों ओर…वे आकृतियाँ खड़ी थी उन्हें घेरे हुए! वही परिवार अब बहुत करीब…इतना करीब… कि उनकी साँसों की ठंडक महसूस हो रही थी!
पेड़ दिखने लगे उनके पैर थे लंबे लंबे…नुकीली टहनियाँ अब हाथ जैसी दिख रही थी!

वे चिल्ला रहे थे…
“रुको…” “यहीं रहो…” “हमारे साथ…”

एड्रियन ने अचानक कुएँ की ओर देखा! कोई भी आकृति उस घेरे के पास नहीं फटक रही थी। उसकी आँखों में एक झलक आई।
“कुएं के पास आओ सभी! जल्दी!” वो चिल्लाया।

सब जैसे किसी आखिरी उम्मीद की तरफ दौड़े।
“ये शायद इनका घेरा है अगर मैं गलत नहीं तो यही इसका बंधन भी है!”

“मतलब?” मार्था काँप रही थी।

“हमें इसे तोड़ना होगा! पत्थरों को हटाओ!
उन्होंने पत्थरों को हटाना शुरू किया।

हर पत्थर भारी…मानो ज़मीन उन्हें जकड़ कर रखे हो ,जैसे ही पहला पत्थर हिला!
एक चीख! पूरा जंगल एक साथ दर्द में चिल्ला उठा!
आकृतियाँ तड़पने लगीं। बूढ़ा आदमी पीछे गिरा!
उसका शरीर मरोड़ खा रहा था।

“जल्दी!” एड्रियन चिल्लाया।

एक-एक करके पत्थर हटते गए…और फिर
घेरा टूट गया। एक आखिरी, भयानक चीख और…
सब कुछ… शांत!

धीरे-धीरे… पेड़ों के बीच से सुबह की रोशनी उतरने लगी।
धुंध छँटने लगी। जंगल… फिर वही था सामान्य लेकिन…
पाँचों नहीं वे एक-दूसरे को देख रहे थे…
थके हुए… डरे हुए!

उन्होंने बिना कुछ कहे वहाँ से निकल जाना ही बेहतर समझा क्योंकि कुछ चीज़ें पीछे छोड़ देना ही सबसे सुरक्षित होता है…

लेकिन ब्लैकवुड वैली…कभी किसी को पूरी तरह जाने नहीं देती।
वे लौट आए थे जिंदा लेकिन…अधूरे!
उन पांचों में से कोई पहले जैसा नहीं था!

सोफिया अब कभी आईना नहीं देखती…क्योंकि उसे पीछे कोई खड़ा दिखता है।

ल्यूकस अकेला रहने से डरता है उसे खाली जगह पर… पानी की आवाज़ सुनाई देती है।

मार्था तस्वीर लेने से घबराती है क्योंकि उसकी हर तस्वीर में पांच और लोग दिखाई देते हैं।

एलियट ने लिखना बंद कर दिया है वो जब भी लिखने बैठता है उसकी उंगलियां गर्म होने लगती है।

और एड्रियन…? हर रात उसे लगता है वो ब्लैकवुड वैली के उस कुएँ में…अब भी खड़ा है और जोर जोर से कोई चिल्ला रहा है…
“वापस आओ…वापस आओ!”

भाग-1 ब्लैकवुड वैली
भाग-2 ब्लैकवुड वैली


लेखिका के बारे में-
मौसमी चन्द्रा
हिंदी साहित्य की एक सशक्त और बहुआयामी रचनाकार हैं।12 अप्रैल 1980 को पटना में जन्मी मौसमी जी ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। आपकी लेखनी में संवेदनाओं, रिश्तों और जीवन के विविध रंगों का सुंदर समावेश देखने को मिलता है।
आपके एकल संग्रहों में “टूटती साँकले”“एक और अमृता”“सप्तपर्णी” और “इश्क़ है कि जादू-टोना” विशेष रूप से चर्चित हैं।
संपादन के क्षेत्र में भी आपने “बात अभी बाकी है”“बसंत आने को है” और “कुल्हड़ भर कहानियां” जैसी कृतियों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साझा संग्रहों में आपकी सक्रिय सहभागिता रही है, जिनमें “प्रतीक्षा में प्रेम”“किस्सागो” और “गुंजित मौन” प्रमुख हैं। आपकी रचनाएँ 300 से अधिक समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं, जो आपकी लोकप्रियता और लेखन क्षमता का प्रमाण हैं। आपकी पाँच लघुकथाओं का नेपाली भाषा में अनुवाद भी किया जा चुका है। डिजिटल मंचों और यूट्यूब चैनलों पर आपकी कहानियाँ और कविताएँ आपकी ही आवाज़ में श्रोताओं तक पहुँचती हैं। वर्तमान में आप “साहित्य प्रवासी” (प्रवासी संदेश) यूट्यूब चैनल की संपादिका के रूप में साहित्य सेवा में सक्रिय हैं।

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