मौसमी चंद्रा लिखित हॉरर स्टोरी ब्लैकवुड वैली का दूसरा भाग

ठक… ठक…!
ल्यूकस ने धीरे से कहा- “ लगता है कोई ऊपर है!”
“इस वीराने में कौन हो सकता है! क्या कोई जानवर या…?”
सोफिया की आवाज़ काँप गई!
एड्रियन ने टॉर्च कसकर पकड़ी-
“चलो चलकर देखते हैं।”
सीढ़ियाँ लकड़ी की थी,हर कदम पर चरमराती…
ऊपर पहुँचते ही एक लंबा गलियारा था… दोनों ओर बंद कमरे।
ठक… ठक…!
आवाज़ आख़िरी कमरे से आ रही थी। एलियट ने दरवाज़े पर हाथ रखा और साथियों से फुसफुसाकर कहा –
“तैयार!”
दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला…अंदर घुप्प अंधेरा!
टॉर्च की रोशनी जैसे ही कमरे में गई-
दीवारों पर वही खरोंचें… लेकिन इस बार और भी गहरी… और ताज़ा! दीवार में एक छोटी सी खिड़की थी।
मार्था ने आगे बढ़कर उसे खोल दिया और कमरे में चारों तरफ देखने लगी।
तभी अचानक…!
खोली गई खिड़की अपने आप जोर से बंद हो गई!
धड़ाम! सब चौंक गए।
एड्रियन ने टॉर्च की रौशनी तेज की उसने देखा
कमरे के कोने में कुछ हिल रहा था!
एक परछाईं झुकी हुई… असामान्य रूप से लंबी हुई
और फिर… गायब!
“नीचे चलो! अभी!” एड्रियन चिल्लाया।
वे भागते हुए नीचे आए।
लेकिन दरवाज़ा जो खुला था… अब बंद हो चुका था।
और बाहर से वही भारी कदमों की आवाज़…जैसे कोई घर के चारों ओर घूम रहा हो!
“ये जगह सही नहीं है… हमें वापस जाना चाहिए!” सोफिया लगभग रो पड़ी।
एड्रियन और ल्यूकस ने हिम्मत करके दरवाज़ा खोला!
बाहर का जंगल अब बदल चुका था।
पेड़ पहले से कहीं ज़्यादा घने… और अजीब तरह से मुड़े हुए थे।
“हम तो इसी रास्ते से आए थे… है ना?” मार्था का सिर चकरा गया।
“हाँ… लेकिन ये… वैसा नहीं है,” ल्यूकस बुदबुदाया।
अचानक एलियट रुका!
“क्या तुम लोगों को भी कुछ सुनाई दे रहा है?”
लेखिका के बारे में-
मौसमी चन्द्रा
हिंदी साहित्य की एक सशक्त और बहुआयामी रचनाकार हैं।12 अप्रैल 1980 को पटना में जन्मी मौसमी जी ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। आपकी लेखनी में संवेदनाओं, रिश्तों और जीवन के विविध रंगों का सुंदर समावेश देखने को मिलता है।
आपके एकल संग्रहों में “टूटती साँकले”, “एक और अमृता”, “सप्तपर्णी” और “इश्क़ है कि जादू-टोना” विशेष रूप से चर्चित हैं।
संपादन के क्षेत्र में भी आपने “बात अभी बाकी है”, “बसंत आने को है” और “कुल्हड़ भर कहानियां” जैसी कृतियों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साझा संग्रहों में आपकी सक्रिय सहभागिता रही है, जिनमें “प्रतीक्षा में प्रेम”, “किस्सागो” और “गुंजित मौन” प्रमुख हैं। आपकी रचनाएँ 300 से अधिक समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं, जो आपकी लोकप्रियता और लेखन क्षमता का प्रमाण हैं। आपकी पाँच लघुकथाओं का नेपाली भाषा में अनुवाद भी किया जा चुका है। डिजिटल मंचों और यूट्यूब चैनलों पर आपकी कहानियाँ और कविताएँ आपकी ही आवाज़ में श्रोताओं तक पहुँचती हैं। वर्तमान में आप “साहित्य प्रवासी” (प्रवासी संदेश) यूट्यूब चैनल की संपादिका के रूप में साहित्य सेवा में सक्रिय हैं।
मौसमी चंद्रा लिखित हॉरर स्टोरी ब्लैकवुड वैली का पहला भाग-
ब्लैकवुड वैली
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