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ब्लैकवुड वैली

घने और अंधेरे जंगल के बीच रहस्यमयी ब्लैकवुड वैली, जहाँ धुंध और डरावना माहौल फैला हुआ है

रहस्यमयी घाटी का खौफनाक सच -धारावाहिक कहानी (भाग-1)

मौसमी चंद्रा

उत्तरी पहाड़ों में एक जगह है ब्लैकवुड वैली। मानचित्रों पर उसका नाम बहुत छोटा लिखा मिलता है, लेकिन आसपास के गाँवों में लोग उसका नाम लेते समय अपनी आवाज़ धीमी कर लेते हैं।

कहते हैं उस घाटी में जंगल,सिर्फ पेड़ों का नहीं है…वो विचित्र आवाज़ों का भी जंगल है और वे आवाजें कभी – कभी अपने साथ…!

चलिए अपनी इस कहानी को शुरू करने के लिए जोड़ते हैं इसमें और पांच लोग…
एड्रियन, ल्यूकस, मार्था, एलियट और सोफिया…गहरे दोस्त और सब के सब एडवेंचर के जबरदस्त शौकीन!
पहाड़ चढ़ना, अनजाने जंगलों में कैंप लगाना,जंगलों को छानना यह सब उनके लिए रोमांच था।

एक दिन एड्रियन ने इंटरनेट पर एक पुरानी जगह के बारे में पढ़ा—ब्लैकवुड वैली!
उस पूरे लेख के आखिर में एक पंक्ति लिखी थी—
“जो लोग वहाँ जाते हैं, वे लौट तो आते हैं…
लेकिन पहले जैसे नहीं रहते!”
बस, यही वाक्य उनके लिए काफी था!

और अक्टूबर की एक ठंडी सुबह…पांच लोग जीप से पहाड़ी रास्तों पर चढ़ते हुए उस घाटी की ओर बढ़ रहे थे। वे बढ़ते गए….चौड़ी सड़क धीरे-धीरे पतली होती गई, और फिर अचानक खत्म हो गई!

आगे बस घना जंगल था।
पेड़ इतने ऊँचे थे कि सूरज की रोशनी मुश्किल से जमीन तक पहुँचती थी। हवा में एक अजीब सी नमी थी।

“यार… ये जगह थोड़ी ज़्यादा ही शांत नहीं है?”
सोफिया ने धीरे से कहा।

ल्यूकस हँस पड़ा—
“जंगल को असली मतलब ही शांति होती है, शोर – शराबे से दूर…बिल्कुल एकांत।”

उन्होंने नदी के किनारे टेंट लगाया। शाम ढलते ही धुंध उतरने लगी।
पहाड़ों के पीछे सूरज डूबा तो ऐसा लगा जैसे किसी ने अचानक सारी दुनिया की रोशनी कम कर दी हो।
रात को उन्होंने आग जलाई।

तभी एलियट ने पूछा-
“तुम लोगों ने वो कहानी पढ़ी थी ना… इस जगह की?”

मार्था ने सिर हिलाया-
“हाँ… कहते हैं यहाँ कभी एक गाँव था।”

“फिर?” एड्रियन ने पूछा।

एलियट ने धीमे स्वर में कहा-
“एक रात पूरा गाँव गायब हो गया! कैसे – कहां किसी को कुछ नहीं पता!”

“वाऊ सो एडवेंचरस!”
मार्था ने आँखें चमकाई और कंधे उचकाकर साथियों को देखा।

आधी रात के करीब अचानक सोफिया की नींद खुली।
उसे लगा कोई टेंट के बाहर कोई चल रहा है…
धीमे- धीमे… भारी कदमों से…
चर्र… चर्र…!
जैसे सूखी टहनियाँ टूट रही हो!

वह उठकर बैठ गई।
“एड्रियन… सुनो…”
सब जाग गए।

कदमों की आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी।
ल्यूकस ने टॉर्च उठाई और बाहर झाँका…कोई नहीं दिखा! बस धुंध… और पेड़ों की लंबी कतारें।

“कोई जानवर होगा,” उसने कहा और टॉर्च बुझाने ही जा रहा था तभी…!
पेड़ों के बीच दो हल्की रोशनियाँ चमकी जैसे किसी की आँखें!

एक पल…और फिर गायब!

उस रात किसी को ठीक से नींद नहीं आई।
दूसरे दिन सुबह सब कुछ सामान्य लग रहा था…उन्होंने घाटी के भीतर जाने का फैसला किया।

जंगल गहराता गया। पेड़ों की छाल काली थी और कई तनों पर डरावने से निशान बने थे…लगता था किसी ने उन तनों को नाखूनों से खरोंचा हो!

“ये क्या है?” मार्था ने पूछा।

एड्रियन झुककर देखने लगा खरोंचें बहुत गहरी थी नाखून के निशान इतने बड़े और गहरे कि आम इंसान के हाथों से बन ही नहीं सकते।

तभी सोफिया ने दूर इशारा किया-“वो देखो!”

पेड़ों के बीच एक पुराना लकड़ी का घर खड़ा था,आधा टूटा हुआ दरवाज़ा हवा में हिल रहा था।

ऐसा लगता था कोई उस घर को बहुत पहले छोड़कर चला गया हो…वे धीरे-धीरे घर के अंदर घुसते गए।
कमरे में धूल और सड़न की गंध थी, दीवारों पर पुराने फोटो लगे थे।
एक तस्वीर में पूरा परिवार खड़ा था-
माँ, पिता और दो बच्चे, लेकिन अजीब बात यह थी कि सभी के चेहरे खरोंचकर मिटा दिए गए थे!

सोफिया काँप गई। तभी ऊपर से आवाज़ आई!
ठक…ठक!
सबने एक-दूसरे को देखा!

क्रमशः….
शेष कहानी अगले अंक में…


लेखिका के बारे में-
मौसमी चन्द्रा
हिंदी साहित्य की एक सशक्त और बहुआयामी रचनाकार हैं।12 अप्रैल 1980 को पटना में जन्मी मौसमी जी ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। आपकी लेखनी में संवेदनाओं, रिश्तों और जीवन के विविध रंगों का सुंदर समावेश देखने को मिलता है।
आपके एकल संग्रहों में “टूटती साँकले”, “एक और अमृता”, “सप्तपर्णी” और “इश्क़ है कि जादू-टोना” विशेष रूप से चर्चित हैं।
संपादन के क्षेत्र में भी आपने “बात अभी बाकी है”, “बसंत आने को है” और “कुल्हड़ भर कहानियां” जैसी कृतियों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साझा संग्रहों में आपकी सक्रिय सहभागिता रही है, जिनमें “प्रतीक्षा में प्रेम”, “किस्सागो” और “गुंजित मौन” प्रमुख हैं। आपकी रचनाएँ 300 से अधिक समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं, जो आपकी लोकप्रियता और लेखन क्षमता का प्रमाण हैं। आपकी पाँच लघुकथाओं का नेपाली भाषा में अनुवाद भी किया जा चुका है। डिजिटल मंचों और यूट्यूब चैनलों पर आपकी कहानियाँ और कविताएँ आपकी ही आवाज़ में श्रोताओं तक पहुँचती हैं। वर्तमान में आप “साहित्य प्रवासी” (प्रवासी संदेश) यूट्यूब चैनल की संपादिका के रूप में साहित्य सेवा में सक्रिय हैं।

खामोश रिश्ते
इंद्रधनुष सा प्रेम
सपनों का चौकीदार
तुमने सिखाया प्रेम…

11 thoughts on “ब्लैकवुड वैली

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