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कीचड़ का कमल

कीचड़ में खिला कमल का फूल, जो संघर्ष और पवित्र प्रेम का प्रतीक है

श्वेता सिंह, मुंबई

भावनाओं में बह गए,
हम तुमसे कुछ कह गए…

तुमने हमें कमल का फूल समझा,
हम कीचड़ में ही रह गए…

बात मेरे प्यार की थी,
जंग मेरे परिवार से थी…

तेरा आना अब उनको भाता नहीं था,
और यह हमको भी रास आता नहीं था…

क्या करें, क्या न करें उलझन ये बड़ी थी,
मेरे माँ-बाप की इज़्ज़त समाज में कुछ तो खड़ी थी…

उन्हें छोड़कर तेरे पास आ नहीं सकती,
प्यार एक रूह का सुकून है, एक इबादत है—
इसे इस तरह किसी के लिए गँवा नहीं सकती…

मुझे लगता था प्यार में तू मेरे सामने खड़ा था,
यह मेरी गलतफ़हमी थी
तू बस मेरे पीछे ही पड़ा था…

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