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पंचक्रोशी यात्रा : तय तारीख से पहले ही आस्था का सैलाब

उज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा के दौरान 118 किमी पदयात्रा पर निकले हजारों श्रद्धालु, सिर पर पोटली और “जय श्री महाकाल” के जयघोष के साथ आगे बढ़ते हुए

हजारों श्रद्धालु पैदल निकले 118 किमी की तपस्या पर

उज्जैन — 118 किमी लंबी पंचक्रोशी यात्रा की औपचारिक शुरुआत भले ही 12 अप्रैल से होनी है, लेकिन श्रद्धा और उत्साह ने तारीख का इंतजार नहीं किया। शुक्रवार शाम से ही हजारों भक्तों ने पटनी बाजार स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर यात्रा का श्रीगणेश कर दिया। सिर पर पोटली, पैरों में दृढ़ विश्वास और जुबां पर “जय श्री महाकाल” के जयघोष के साथ श्रद्धालु कठिन पदयात्रा पर निकल पड़े।

यात्रा के पहले ही दिन करीब 2000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कई यात्रियों ने रामघाट पर विश्राम किया और सुबह शिप्रा नदी में स्नान कर आगे की राह पकड़ी। हालांकि शहर के कुछ मार्गों पर निर्माण कार्य और खुदाई के कारण कंकड़-पत्थरों से होकर गुजरना पड़ा, फिर भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।यात्रा का पहला प्रमुख पड़ाव पिंगलेश्वर महादेव मंदिर है, जहां तक लगभग 12 किमी की दूरी तय की जाती है। इसके बाद श्रद्धालु कायावरुणेश्वर, बिल्वकेश्वर, कालियादेह और जैथल होते हुए अंत में कर्कराज महादेव के दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण करते हैं। प्रशासन द्वारा जगह-जगह पानी, टैंकर और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई है, वहीं ग्रामीणों ने भी सेवा भाव से भोजन और ठहरने की व्यवस्था की है।इस यात्रा में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। उज्जयिनी सेवा समिति द्वारा प्रत्येक पड़ाव पर भोजन प्रसादी की व्यवस्था की जा रही है।
श्रद्धालुओं की जुबानी आस्था की कहानी:

“मैं पिछले 8 वर्षों से यह यात्रा कर रहा हूं। हर बार एक नई ऊर्जा मिलती है और मन को अद्भुत शांति मिलती है।”

“यह मेरी पहली पंचक्रोशी यात्रा है। परिवार से प्रेरणा मिली और इस बार हिम्मत जुटाकर निकल पड़ा हूं।”

“मैं गुजरात से हर साल यहां आता हूं। मनोकामना पूर्ण होने के बाद इस यात्रा से गहरा जुड़ाव हो गया है।”

“बचपन से यात्रियों को देखता था, इस बार खुद शामिल होकर एक अलग ही सुकून महसूस हो रहा है।”

पंचक्रोशी यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, धैर्य और सामूहिक सेवा का जीवंत उदाहरण बनती नजर आ रही है।

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