
मुंबई से मधु चौधरी की रिपोर्ट
अंधेरी स्थित “भवन्स कल्चरल सेंटर” में 18 जुलाई को एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्री बीरेंद्र शाह फाउंडेशन की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘विरासत’ के सातवें अंक “रामायण की अवांतर कथाएँ” विशेषांक तथा सुप्रसिद्ध लेखिका एवं प्रधान संपादक रागिनी बीरेंद्र शाह की नई पुस्तक ‘शब्द पुंज’ का सफलतापूर्वक लोकार्पण संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. वर्षा महेश के कुशल एवं प्रभावी मंच संचालन तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद अन्नपूर्णा गुप्ता और पल्लवी रानी ने अपनी मधुर आवाज़ में माँ सरस्वती की वंदना प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को सात्विक एवं संगीतमय बना दिया। लोकार्पण के इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए दिग्गजों ने शिरकत की. जिनमें मुख्य अतिथि एवं अतिथि संपादक – डॉ. राजेश श्रीवास्तव जी (रामायण भूषण), भोपाल। सारस्वत अतिथि – पूज्यनीय शिवांगी नंद गिरी जी।विशिष्ट वक्ता – डॉ. ख्याति पुरोहित (अहमदाबाद), संपादक मंडल की सदस्य सुधा दुबे जी (भोपाल)।विशिष्ट वक्ता – डॉ. अजीत राय।विशिष्ट अतिथि – रवि यादव जी एवं चित्रा देसाई जी थे.समारोह के दौरान ‘विरासत’ के प्रबंध निदेशक श्री आशीष शाह जी एवं श्री प्रसून शाह जी, तथा प्रधान संपादक रागिनी बीरेंद्र शाह जी ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं अपने संपादक मंडल के सदस्यों को शाल एवं ‘साहित्य साधक सम्मान’ से सम्मानित किया।
कार्यक्रम में विद्वान वक्ताओं के वक्तव्यों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सारस्वत अतिथि शिवांगी नंद गिरी जी ने अपने ओजस्वी एवं मधुर वक्तव्य में जीवन को सहज और सरल तरीके से जीने का मार्ग बताया। उनकी वाणी का श्रोताओं पर गहरा प्रभाव दिखाई दिया।मुख्य अतिथि डॉ. राजेश श्रीवास्तव जी ने रामायण की अवांतर कथाओं के रोचक प्रसंग साझा किए। उन्होंने केवट के पूर्वजन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि रामायण का प्रत्येक पात्र अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशिष्ट वक्ता डॉ. अजीत राय ने भरत जी के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही तथा सूर्पनखा के प्रसंग के अंतर्गत माता सीता के विचारों को रेखांकित किया।

अहमदाबाद से आईं डॉ. ख्याति पुरोहित ने सीतामढ़ी (बिहार) से लेकर नेपाल (सीता जन्मस्थली) तक की अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। माता सीता से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए वे भावुक हो उठीं, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय हो गया।’शब्द पुंज’ की समीक्षा करते हुए विशिष्ट अतिथि रवि यादव जी ने रागिनी बीरेंद्र शाह की पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने पुस्तक की कविताओं, जैसे— ‘साड़ियाँ’, जो मायके की यादें ताज़ा कराती है, तथा ‘देवर’, जो संयुक्त परिवार की खूबसूरती को बयां करती है, का विशेष उल्लेख किया।पत्रिका की सह-संपादिका मधु चौधरी ने साहित्य प्रेमियों को ‘विरासत’ पत्रिका की शुरुआत से लेकर उसके सातवें अंक तक के पड़ावों और साहित्यिक यात्रा की रोचक जानकारी दी।

कार्यक्रम के अध्यक्ष संतोष झा जी किन्हीं अपरिहार्य कारणों से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से ‘विरासत’ परिवार को अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। इसके अलावा, शशि रंजन जी की बेहतरीन सांस्कृतिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।खराब मौसम के बावजूद मुंबई की कई जानी-मानी साहित्यिक हस्तियाँ इस समारोह की साक्षी बनने पहुँचीं, हालांकि कुछ लोग मौसम के मिज़ाज के कारण आने से वंचित भी रह गए। कार्यक्रम के समापन पर प्रधान संपादक रागिनी बीरेंद्र शाह जी ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया।
