डॉ.अमरेंद्र की काव्य पुस्तक विशाखा विमोचित

स्नेह, सम्मान और साहित्य के त्रिवेणी संगम में सम्पन्न हुआ ‘विशाखा’ का विमोचन केवल एक पुस्तक-प्रस्तुति नहीं, बल्कि संवेदनाओं का उत्सव था। बिना किसी भव्य मंच के, आत्मीय वातावरण में शब्दों ने आत्मा से संवाद किया और बिहार की दो बेटियों के संकल्प ने ‘मिलकर प्रेरित करें बिहार’ को जीवंत अर्थ दे दिया।

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मन से मंच तक : कवयित्रियों के संगम से महका साहित्य जगत

महिला काव्य मंच का अष्टम अंतरराष्ट्रीय वार्षिकोत्सव, मुंबई में 21 दिसंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। देश-विदेश की 25 इकाइयों की कवयित्रियों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पुस्तकों का लोकार्पण, ‘मकाम’ ध्येय गीत की प्रस्तुति और 50 से अधिक कवयित्रियों का काव्य पाठ शामिल था। महाराष्ट्र इकाई को सर्वोत्तम प्रदेश इकाई सम्मान 2024 से नवाजा गया।

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शताब्दी वर्ष पर मोहन राकेश को याद किया ‘बतरस’ ने॰॰॰

मुंबई के केशव गोरे ट्रस्ट सभागार में सांस्कृतिक संस्था ‘बतरस’ के 27वें मासिक आयोजन में साहित्यकार मोहन राकेश की रचनात्मक विरासत पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य और नाटक का सशक्त स्तंभ बताते हुए कहा कि उनका साहित्य आज भी सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं के कारण प्रासंगिक है। कार्यक्रम में उनके नाटकों और कहानियों के अंशों की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ हुईं और समापन राष्ट्रगीत के साथ किया गया।

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आजोल यूथ क्लब के क्रिकेट महाकुंभ में उमड़ा जोश

मुंबई के कांदिवली स्थित स्पोर्ट्स अकादमी का माहौल रविवार, 16 नवंबर को सुबह से ही क्रिकेट के रंग में रंग चुका था. अजोल यूथ क्लब द्वारा आयोजित वन-डे लिमिटेड ओवर क्रिकेट टूर्नामेंट ने युवाओं में ऐसा जोश भर दिया कि पूरा मैदान तालियों, शोरगुल और उत्साह के नारों से गूंज उठा. टूर्नामेंट का शानदार आगाज़ मातोश्री उर्मिलाबेन शाह परिवार के हाथों शुभारंभ के साथ हुआ.

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 वो लड़की

सोमेश की कंपनी में नया प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, इसलिए अब उसे ऑफिस में ज़्यादा देर तक रुकना पड़ता था. इस बात से उसका मन खिन्न हो रहा था. दस बजे की मेट्रो से उतरकर वह ऑटो की ओर बढ़ा. जैसे ही वह ऑटो में बैठा, वैसे ही एक खुशबू का झोंका उसकी नाक से टकराया.
रुको, मुझे भी ले चलो, लगभग हांफते हुए उस लड़की ने कहा.
वो खूबसूरत चेहरा, हिरणी सी आंखें, बाल हवा में बिखरे हुए, साड़ी पहने हुए थी. कहते-कहते ही वह बैठ गई.अरे! ऐ, इन साहब ने ऑटो रुकवाया है, तुम किसी और में चली जाओ, ऑटो वाले ने डपटते हुए कहा.

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अमिताभ की ‘अक्स’ से अपनी ‘अक्स’ तक

अमिताभ बच्चन के 83वें जन्मदिन पर एक्स पर उन्हें बधाई देते हुए उनकी फ्रेंच कट दाढ़ी को लेकर एक विचार आया—आख़िर ये दाढ़ी वे कब से रख रहे हैं? यह सोचने की वजह भी खास थी, क्योंकि अपन भी ऐसी ही दाढ़ी वाले हैं।

अस्सी के दशक में मुंबई में बाल ठाकरे ने इस दाढ़ी को लोकप्रिय बनाया। फिर प्रीतिश नंदी और अमिताभ बच्चन—इन तीनों की पहचान इस स्टाइल से जुड़ी रही। गूगल बाबा ने बताया कि बिग बी की फ्रेंच कट दाढ़ी 24 साल की हो गई है—फिल्म ‘अक्स’ (2001) से शुरू हुई यह पहचान अब स्थायी बन चुकी है।
और अपन? हमारी दाढ़ी तो 39 साल पुरानी! शादी के दिन (1986) भी यह चर्चा में रही—जब एक रिश्तेदार ने हँसकर पूछा, “कंवर साब, दाढ़ी नहीं कटवाई?” तो जवाब दिया—“आपको मेरी दाढ़ी से फेरे पड़वाने हैं या मुझसे?” ठहाके गूंज उठे, बात वहीं खत्म।

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हिंदी साहित्य भारती : राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ का गठन

हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित अंतरराष्ट्रीय संस्था हिंदी साहित्य भारती ने मुंबई, महाराष्ट्र में राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ की नई इकाई का गठन किया।

कार्यक्रम का आयोजन द प्रेसीडेंसी रेडियो क्लब में किया गया, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती संजना लाल ने की। महानगर कोलकाता से पधारी डॉ. सुनीता मंडल, अध्यक्ष, हिंदी साहित्य भारती राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ, ने सभी साहित्यकारों और कवयित्रियों का स्वागत करते हुए महिला प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली और उद्देश्यों को साझा किया।

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भारतीय साहित्य संकल्पना और वैश्विक प्रभाव पर मंथन

विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, उज्जैन द्वारा मराठा मंदिर साहित्य शाखा, मुंबई एवं विश्व हिन्दी प्रचार प्रसार संस्थान, पुणे के सहयोग से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संचेतना महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर “भारतीय साहित्य : संकल्पना और वैश्विक प्रभाव” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि श्री सुरेश चंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नॉर्वे) और मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा (उज्जैन) सहित देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने भाग लिया। संगोष्ठी में भारतीय साहित्य की वैश्विक भूमिका, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। शाम को हुए कवि सम्मेलन में भारत, अमेरिका और नॉर्वे के कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन साहित्यिक आदान-प्रदान, भारतीय विचारधारा और विश्व शांति के संदेश को समर्पित रहा।

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ढाक बाजा, धुनुची और सिंदुर खेला के रंगों में रंगा बोरीवली

अष्टमी के अवसर पर बोरीवली पूर्व स्थित एवान एंक्लेव सोसायटी की महिलाओं ने पारंपरिक बंगाली वेशभूषा में मां दुर्गा की आराधना हेतु नृत्य प्रस्तुत कर कोलकाता की दुर्गा पूजा की झलक मुंबई में साकार कर दी। बारिश के बावजूद उनका उत्साह देखने लायक था। विभिन्न सम्प्रदायों से जुड़ी महिलाओं ने मिलकर यह नृत्य तैयार किया, जिसमें दुर्गा पूजा के धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक पहलुओं को सुंदरता से प्रस्तुत किया गया। मां दुर्गा के रूप में सजी अश्विका और बाल कलाकारों की भूमिकाओं ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। दर्शक भाव-विभोर हो उठे और एवान एंक्लेव का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

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“सृजनिका” के छठे अंक का गरिमामयी लोकार्पण

मुंबई से प्रकाशित त्रैमासिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका सृजनिकाके छठे अंक का लोकार्पण मंगलवार, 26 अगस्त को कुर्ला स्थित यूकेएस इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ एंड रिसर्च के सभागार में हुआ.
समारोह के मुख्य अतिथि हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक (नॉन-फ्यूल बिज़नेस) मुरलीकृष्ण वेंकट वाद्रेवु ने हिंदी को व्यवसाय-वृद्धि की महत्वपूर्ण सहयोगी भाषा बताते हुए अपने अनुभव साझा किए.

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