
सपना परिहार, बिरलाग्राम नागदा जं.
स्कूल से कॉलेज और कॉलेज से लेकर आज तक के सफर में मेरे कई दोस्त बने। लेकिन यदि सच्ची मित्रता की बात करूँ, तो मेरे जीवन में तीन ऐसे मित्र हैं, जो हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। सुख हो या दुख, किसी भी प्रकार की परेशानी हो, वे हर परिस्थिति में मेरे साथ रहे हैं।
कहते हैं कि जीवन में माता-पिता हमें ईश्वर की देन के रूप में मिलते हैं। रिश्ते भी जन्म के साथ या परिवार से मिल जाते हैं। लेकिन यदि हम अपने जीवन में किसी रिश्ते का चुनाव स्वयं करते हैं, तो वह है दोस्ती। दोस्त का चुनाव हम स्वयं करते हैं और वही दोस्त हमें हमारे अच्छे-बुरे की पहचान भी कराते हैं।
किसी को भी मित्र बना लेना बहुत आसान होता है, लेकिन सबसे आवश्यक बात यह है कि जिसे हम मित्र बना रहे हैं, क्या वह जीवनभर हमारा मित्र बना रहेगा? कई खट्टी-मीठी यादों के साथ हम मित्रता को आगे बढ़ाते हैं। बहुत से लोग मित्रता को केवल अपनी दृष्टि से देखते हैं, लेकिन मैं जिन मित्रों की बात कर रही हूँ, उन्होंने हर मुसीबत में मेरा साथ दिया, मुझे आगे बढ़ाया और मेरा हौसला बढ़ाया।
हमारी मित्रता में किसी प्रकार की स्वार्थ या बदले की भावना नहीं है। मेरे ऐसे मित्र हैं, जो मुझे केवल इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि मैं मैं हूँ। वे मेरी अच्छी और बुरी दोनों आदतों को स्वीकार करते हैं। गलती होने पर डाँटते भी हैं, रूठने पर मनाते भी हैं और कई बार बिना कहे ही मेरे मन की बात समझ लेते हैं।
कहते हैं कि मित्र सुदामा जैसा होना चाहिए, लेकिन मैं कहती हूँ कि मित्र यदि हो, तो कृष्ण जैसा हो—जो सारथी बनकर हमारा मार्गदर्शन करे, हमें सही राह दिखाए और हर परिस्थिति में एक मजबूत ढाल बनकर हमारा साथ दे।
दोस्ती केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि एक ऐसा मजबूत बंधन है, जिसे कोई भी परिस्थिति आसानी से तोड़ नहीं सकती। सच्चे मित्र छोटी-छोटी बातों का बुरा नहीं मानते। वे सबको साथ लेकर चलते हैं और किसी के बहकावे में नहीं आते।
यहाँ मैं अपनी दो सहेलियों का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहती हूँ। वे मेरी ज़िंदगी में बहुत मायने रखती हैं। हमारी दोस्ती को पैंतीस वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी हमारे रिश्ते की मजबूती वैसी ही बनी हुई है।
हम एक-दूसरे के फोन का इंतज़ार नहीं करते। बात करने के लिए न कोई दिन देखते हैं, न समय। जब भी मन होता है, हम एक-दूसरे को फोन कर लेते हैं और हाल-चाल पूछ लेते हैं। कभी-कभी मुलाकात भी हो जाती है और कई बार पूरे साल भी नहीं मिल पाते। लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि हमारी दोस्ती में कोई कमी आ गई है।
हम एक-दूसरे की भावनाओं को समझते हैं। कभी-कभी गुस्सा भी हो जाता है, लेकिन थोड़ी ही देर बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है।
आज भी कॉलेज के वे दिन बार-बार याद आते हैं। उस समय हमारे ऊपर किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं थी। घूमना-फिरना, फिल्में देखना, सैर-सपाटा, पार्टियाँ और ढेर सारी मस्ती—जीवन में किसी बात की कोई चिंता नहीं थी। सचमुच, समय कितनी जल्दी बीत जाता है, इसका पता ही नहीं चलता। आज सभी अपने-अपने परिवार और जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं, फिर भी हम एक-दूसरे के लिए थोड़ा-सा समय निकाल ही लेते हैं।
हमारी मित्रता शब्दों की मोहताज नहीं है और न ही उसमें किसी प्रकार का दिखावा है। जब भी किसी की याद आती है, हम तुरंत फोन उठाकर हाल-चाल पूछ लेते हैं। कभी-कभी महीनों बात नहीं होती और कभी एक ही महीने में दो-तीन बार बातें हो जाती हैं।
हम सभी एक-दूसरे से बहुत दूर रहते हैं, लेकिन दूरी ने कभी हमारी मित्रता को कम नहीं किया। ज़रूरी नहीं कि दूर रहने वाले दोस्ती निभा न सकें। जो दोस्ती निभाना जानते हैं, वे दूरियों को भी मात दे देते हैं।
मेरा मानना है कि जीवन में मित्र अवश्य होने चाहिए, क्योंकि जब घर-परिवार में कभी निराशा होती है या कोई परेशानी आती है, तब सच्चे मित्र ही मन का बोझ हल्का कर देते हैं। उन्हीं के सामने हम अपने मन की हर छोटी-बड़ी बात निस्संकोच कह पाते हैं।
शायद माता-पिता के बाद मित्रता ही ऐसा रिश्ता है, जो सबसे मजबूत होता है। मेरे लिए दोस्ती का अर्थ ही जीवन है, और यदि जीवन है तो दोस्ती भी है।
मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करती हूँ कि मेरे जीवन में जो भी सच्चे मित्र मिले हैं, वे हमेशा स्वस्थ, प्रसन्न और खुश रहें। जब तक हम जीवित रहें, भले ही हमारे हाथों में लाठी हो, आँखों पर चश्मा हो और हम चलने-फिरने में असमर्थ हो जाएँ, फिर भी हमारी दोस्ती इसी प्रकार बनी रहे।
मित्र कभी-कभी कड़वी दवाई की तरह भी होते हैं और औषधि की तरह भी। इसलिए उनकी छोटी-छोटी गलतियों को दवाई समझकर पी जाना चाहिए और उनके घावों पर औषधि बनकर मरहम लगाना चाहिए। अपने सच्चे मित्रों का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि दोस्ती ईश्वर का दिया हुआ सबसे अनमोल उपहार है।
जब भी आपको लगे कि आप अकेले हैं, तुरंत अपने मित्र से बात कीजिए। अपने मन का बोझ हल्का कीजिए। दोस्तों से मिलिए, दूरियाँ मिटाइए और अकेलेपन को दूर भगाइए। उनके चेहरे की मुस्कान बनने की कोशिश कीजिए, ताकि जब भी उन्हें आपकी याद आए, उनके चेहरे पर स्वतः एक प्यारी-सी मुस्कान खिल उठे और वे आपकी यादों में भावुक हो जाएँ।
घर-परिवार अपनी जगह बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन दोस्तों का साथ और सच्ची दोस्ती का स्थान भी जीवन में कम नहीं होता। इसलिए हमेशा अपने मित्रों पर विश्वास बनाए रखिए और अपनी दोस्ती को मजबूती से थामे रखिए। कौन जाने कल क्या हो! इसलिए जहाँ तक संभव हो, अपने मित्रों से जुड़े रहिए और उन्हें सितारों की तरह अपने दिल के आसमान में सहेजकर रखिए।
मेरे जीवन का तीसरा मित्र वह है, जिसने मेरे जीवन को नई दिशा दी। उसने बिना किसी स्वार्थ के मुझे आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया, लेखन के लिए उत्साहित किया और हर कदम पर मेरा मनोबल बढ़ाया। दुःख की घड़ी में उसने मुझे हिम्मत दी, आगे बढ़ने में मेरा साथ दिया। आज भी मेरे तीनों मित्र मेरी सबसे बड़ी ताकत और मेरी हिम्मत बनकर मेरे साथ खड़े हैं।
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