दोस्ती

दो पुराने भारतीय मित्र वर्षों बाद मुस्कुराते हुए गले मिलते हुए, जो सच्ची दोस्ती, विश्वास और अटूट रिश्ते की भावनाओं को दर्शाते हैं।

खुशबू गोयल, सिलीगुड़ी

दोस्ती तेरी-मेरी कुछ इस तरह की है,
जहाँ दूरी है, पर अपनापन भी है।

हम औरों की तरह घंटों बातें नहीं करते,
पर जब भी करते हैं,
दिल के हर राज़ खोल देते हैं।

हम कभी मिलते नहीं,
कभी एक-दूजे के साथ घूमते नहीं,
फिर भी कुछ अलग-सी
गहराई है हमारी दोस्ती में।

चाहे कितनी भी कम बातें
क्यों न हों हमारे दरमियाँ,
न तुझसे कुछ छिपा है,
न ही मुझसे तेरा हाल छिपा है।

हमारी दोस्ती लगभग बीस साल पुरानी है,
फिर भी हर वक़्त
एक नई कहानी है।

वक़्त बदला, हालात बदले,
पर हम नहीं बदले।
आज भी बचपन की तरह
नादानियों भरी बातें करते हैं।

आज भी छोटी-छोटी बातों पर
एक-दूजे से रूठ जाते हैं,
फिर उसी अपनापन से
एक-दूजे को मना भी लेते हैं।

ये सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा,
हर मोड़ पर हम मुस्कुराते रहेंगे।
क़दमों का फ़ासला चाहे जितना भी हो,
इस दोस्ती को आख़िरी वक़्त तक निभाते रहेंगे।

इन रचनाओं को भी पढ़ें

“न कॉल, न मैसेज, न कोई वजह… आखिर क्यों रिश्तों में बढ़ रहा है घोस्टिंग का चलन ?”
फ्रेंडशिप डे
दोस्त
मैं कौन हूँ ?
वो तीन दिन
तुम्हारा बाय कहना मुझे अच्छा नहीं लगता..
कॉफी कनेक्शन
 एक मौसम फिर लौट आया
कैफे हाउस …
वह दास्तान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *