
खुशबू गोयल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
दिल करता है कहीं दूर चली जाऊँ…
जहाँ कुछ लम्हे अकेली रह पाऊँ।
न किसी को सुनूँ, न किसी को सुनाऊँ,
बस थोड़ा-सा वक़्त खुद के साथ बिताऊँ।
जहाँ समुद्र हो,
लेकिन उसकी तरह दिल में कोई मलाल न हो।
जहाँ पहाड़ हों,
लेकिन उनकी तरह दिल पर कोई भार न हो।
हवा के झोंके हों—
आज़ाद उड़ते हुए,
जहाँ मुझ पर कोई रोक-टोक न हो।
मेरा सवेरा हो, मेरी मर्ज़ी से…
मैं उठूँ अपने वक़्त पर,
न किसी घड़ी के हुक्म पर।
ढलते सूरज को चुपचाप बैठकर देखूँ,
रोशनी की उस आख़िरी
किरण में खो जाऊँ।
जो करना हो,
जैसा करना हो,
बस अपनी मर्ज़ी से कर पाऊँ।
कुछ पल…
बस कुछ पल ही सही,
लेकिन खुद के साथ,
खुद में जी पाऊँ।
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बहुत सुंदर
Superb ❤️
Thank you