उज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा के दौरान 118 किमी पदयात्रा पर निकले हजारों श्रद्धालु, सिर पर पोटली और “जय श्री महाकाल” के जयघोष के साथ आगे बढ़ते हुए

पंचक्रोशी यात्रा : तय तारीख से पहले ही आस्था का सैलाब

ज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा की औपचारिक शुरुआत से पहले ही हजारों श्रद्धालु 118 किमी लंबी पदयात्रा पर निकल पड़े। महाकाल के जयघोष और अटूट आस्था के साथ भक्त कठिन रास्तों को पार करते हुए अपने आध्यात्मिक सफर को पूरा करने में जुटे हैं।

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शत्रुंजय गिरिराज पालीताणा की सात यात्रा पूर्ण होने पर जैन तपस्वी अंकित बोथरा का बहुमान करते श्रद्धालु, हाथों में ध्वज, कुमकुम-अक्षत से स्वागत और भगवान आदिनाथ के जयकारों के बीच भक्तिमय वातावरण।

घोर तप और संयम की मिसाल बने तपस्वी अंकित बोथरा

शत्रुंजय गिरिराज की दिव्य सात यात्रा पूर्ण, तपस्वी का भावभरा बहुमान सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज महिदपुर रोड।जय आदिनाथ… जय आदिनाथ…भगवान आदिनाथ के मंगलकारी जयकारों से गुरुवार को महिदपुर रोड नगर का कण-कण भक्तिरस में सराबोर हो उठा। अवसर था शत्रुंजय गिरिराज पालीताणा महातीर्थ की चौविहार छठ सहित अत्यंत दुर्लभ एवं पुण्यप्रद सात यात्रा…

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चरैवेति का अर्थ

चरैवेति – चलना मनुष्य का धर्म है। घुमक्कड़ी केवल यात्रा नहीं, बल्कि जिज्ञासा, अनुभव और आत्मशक्ति का मार्ग है। आदिम मनुष्य से लेकर आधुनिक घुमक्कड़ों तक, हर कदम हमें प्रकृति, समाज और संस्कृति से जोड़ता है। यही जिज्ञासा हमें नई कल्पनाओं और अंतहीन संभावनाओं की ओर ले जाती है।”

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जाग रे इंसान

गुरु मनुष्य को समझाते हैं कि हे इंसान, अब सो मत, जाग जा। तेरे जीवन का अधिकांश समय काम और जिम्मेदारियों में बीतता है, परंतु यदि तू तेईस घंटे कर्म करता है तो एक घंटा प्रभु के ध्यान के लिए अवश्य निकाल। यही तेरे जीवन का सच्चा संतुलन है।

मनुष्य का यह शरीर नौ द्वारों से बना है, जिनसे वह सांसारिक कार्य करता है। परंतु जब वह शब्द-ध्वनि के माध्यम से दसवें द्वार से जुड़ता है, तब उसे भगवान का साक्षात्कार होता है। यही शाश्वत सत्य है।शब्द ही वह शक्ति है जिसने धरती और आकाश को थाम रखा है। सृष्टि की जननी शब्द है, और शब्द ही प्रकाश देता है। जो इस सत्य को पहचान लेता है, वही ईश्वर की निकटता को प्राप्त करता है।
जो मनुष्य तन और मन के बंधनों से मुक्त नहीं होता, वह कालचक्र में फँसा रहता है। ऐसा व्यक्ति जीवन भर संघर्ष करता है और अंततः उसे सबकुछ त्यागकर जाना पड़ता है।

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