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घोर तप और संयम की मिसाल बने तपस्वी अंकित बोथरा

शत्रुंजय गिरिराज पालीताणा की सात यात्रा पूर्ण होने पर जैन तपस्वी अंकित बोथरा का बहुमान करते श्रद्धालु, हाथों में ध्वज, कुमकुम-अक्षत से स्वागत और भगवान आदिनाथ के जयकारों के बीच भक्तिमय वातावरण।

शत्रुंजय गिरिराज की दिव्य सात यात्रा पूर्ण, तपस्वी का भावभरा बहुमान

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज

महिदपुर रोड।
जय आदिनाथ… जय आदिनाथ…
भगवान आदिनाथ के मंगलकारी जयकारों से गुरुवार को महिदपुर रोड नगर का कण-कण भक्तिरस में सराबोर हो उठा। अवसर था शत्रुंजय गिरिराज पालीताणा महातीर्थ की चौविहार छठ सहित अत्यंत दुर्लभ एवं पुण्यप्रद सात यात्रा के सफलतापूर्वक सम्पन्न होने पर तपस्वी अंकित बोथरा के भव्य बहुमान का।

नगर के वरिष्ठ सुश्रावक भेरूलाल बोथरा के पौत्र एवं संतोष-आशा बोथरा के सुपुत्र अंकित बोथरा ने घोर तपस्या, संयम, श्रद्धा और आत्मसमर्पण के साथ शत्रुंजय गिरिराज की मोक्षदायिनी सात यात्रा निर्विघ्न पूर्ण की। इस आत्मिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में बोथरा परिवार की ओर से श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर से बहुमान यात्रा का शुभारंभ किया गया।

बहुमान यात्रा में सकल जैन श्रीसंघ श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्मिलित हुआ। “वंदे आदिनाथं”, “शत्रुंजय गिरिराज की जय” जैसे भक्तिमय घोषों से वातावरण पावन हो गया। हर कदम पर तपस्वी के त्याग, संयम और साधना की भावपूर्वक अनुमोदना की गई, जिससे श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ अर्जित किया।

यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बोथरा निवास पहुंची, जहां सकल जैन श्रीसंघ एवं समाजजनों द्वारा तपस्वी अंकित बोथरा का भावभीना स्वागत एवं बहुमान किया गया। लाभार्थी भेरूलाल बोथरा परिवार द्वारा उपस्थित महानुभावों का कुमकुम-अक्षत से मंगल अभिवादन कर संघ पूजा संपन्न कराई गई। पूरा वातावरण भक्ति, विनय और कृतज्ञता से ओतप्रोत रहा।

इसके पश्चात क्षेत्रीय विधायक दिनेश जैन बोस के निवास स्थान पर भी रमेशचंद-दिनेश जैन बोस, राजेश कुमार, मनोज कुमार, राहुल कुमार बोथरा परिवार द्वारा तपस्वी का श्रद्धापूर्वक बहुमान एवं संघ पूजा का आयोजन किया गया।

धर्मप्रेमियों ने बताया कि जैन धर्म में शत्रुंजय गिरिराज की सात यात्रा को अत्यंत दुर्लभ और महापुण्यकारी माना गया है। यह यात्रा दो दिन के चौविहार उपवास के साथ, बिना अन्न-जल ग्रहण किए, हजारों सीढ़ियों को सात-सात बार चढ़ते-उतरते हुए पूर्ण की जाती है। शास्त्रों में वर्णित है कि उत्कृष्ट विधि, शुद्ध भाव और पूर्ण समर्पण के साथ की गई सात यात्रा से साधक के कर्म क्षीण होते हैं और तीसरे भव में मोक्ष प्राप्ति की प्रबल संभावना बनती है। शत्रुंजय महातीर्थ की यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, तपस्या और कर्मबंधन से मुक्ति का दिव्य साधन है।

इस पुण्य अवसर पर क्षेत्रीय विधायक दिनेश जैन बोस, जैन श्रीसंघ अध्यक्ष अजय चोरड़िया, सकल जैन श्रीसंघ के पदाधिकारी, समाज के वरिष्ठ महानुभाव, नवयुवक मंडल, महिला मंडल, बहू मंडल, तरुण एवं बालिका परिषद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और तपस्वी के तप की भावविभोर होकर अनुमोदना की।

उक्त जानकारी नगर के सामाजिक कार्यकर्ता एवं जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने दी।

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