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चेतना और मनुष्य का संवाद

पेड़ के नीचे ध्यान में बैठा व्यक्ति और सामने प्रकाश रूप में प्रकट चेतना, आत्मसंवाद और आंतरिक शांति का प्रतीक

सुरेखा अग्रवाल

मनुष्य
पता है…
बहुत आसान है रहस्यवाद को समर्पित करती पंक्तियाँ, दूरदृष्टि को दर्शाती वह चेतना, हर मंज़िल के पते, हिमशिखरों पर अवांछित मन के अंतर्गुंज को नज़रअंदाज़ करना; सहयात्रियों को कष्ट देकर मोक्ष का शंखनाद करना सरल है।
पर बिछोह का गरल, उपेक्षाओं की समाधि, प्रतीक्षा की वेदी पर जीवन की सुलगती चिता पर बैठाना कहाँ का औचित्य है, हे तथागत..!

चेतना…
अंतर्मन की आवाज़ शांत नहीं होगी, जब तक बाह्य गतिविधियों की मंत्रणाओं को उग्र होने से नहीं बचाओगे।
उन चार लोगों की मध्यस्थता को जब तक अविलंब तिलांजलि नहीं दोगे, हमारी चेतना ऊर्जाहीन रहेगी।

तो सुनो-
पहले कर्णों की आवाजाही को मौन कुंडल पहनाओ, फिर मन के चक्षुओं को पारदर्शिता के आईने के समक्ष खड़ा करके, इस जर्जर होती मानवीय मंशाओं को दिमाग के पटल पर प्रेषित करो।
सर्वप्रथम स्वयं श्रेष्ठतम बनो।

विरक्त होकर मन की भाषा के साथ संवाद ज़रूरी है, हे तथागत।
प्रेम, वियोग, बिछोह, नफ़रत, आडंबर, लालसा—त्यागना आसान नहीं साधारण मनुष्य के लिए।
असाधारण तुम नहीं हो सकते, पता है क्यों?
क्योंकि अभी भी तुम मोह में हो और उन चार विभूतियों से घिरे हो… जो होते ही नहीं।

नज़र, श्रवण, स्वाद के साथ ख़्वाहिशें त्यागो-निसंदेह तुम्हारा कहा लोग समझेंगे।
चिंतन, मनन और बहस के मुद्दों में उलझोगे तो,
हे तथागत,
तुम एक चेतन्य चिंतक नहीं कहलाओगे।

आसान नहीं होता कुछ त्यागना सुनो, विरक्त होना पड़ता है, निश्छल होना पड़ता है,
मन के भावों को समान रखना पड़ता है।

तुम और मैं से परे जिस दिन हो जाओगे,
अवचेतन मन सिर्फ तुम्हारा होगा।

ब्रह्मत्व में विलीन होने के लिए मृत्यु ज़रूरी नहीं,
बस मन की शांत समाधि ही काफ़ी है…!

यूँ ही अशांत मन की एक पीड़ा-
जब ज़िंदगी के बारे में सोचती हूँ, तो सोच का धरातल शून्य हो जाता है… 😊😊

सन्यास के साथ समाधिस्थ होना मुश्किल ही लगा,
आखिर साधारण मनुष्य घबरा ही जाता है-क्यों, सच है न?

बस एक बात खरी-
आदतें पड़ जाती हैं हर संघर्ष के साथ चलने की… मुस्कुराते हुए।

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लेखिका के बारे में-


सुरेखा अग्रवाल ‘स्वरा’

समकालीन हिंदी साहित्य की एक सशक्त और संवेदनशील रचनाकार हैं।
महाराष्ट्र में जन्मी और उत्तर प्रदेश में स्थायी रूप से निवासरत, आपने अंग्रेज़ी और एंथ्रोपोलॉजी में स्नातक शिक्षा प्राप्त की है।
आपकी लेखनी में भावनाओं की गहराई और सामाजिक सरोकारों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। आप कई साझा संग्रहों “रूह की आवाज़” और “कश्ती में चाँद” से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और डिजिटल मंचों पर आपकी कविताएँ, लघुकथाएँ और संस्मरण निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। आप आकाशवाणी, पॉडकास्ट और रेडियो मंचों पर सक्रिय सहभागिता के साथ लगभग 70 से अधिक कार्यक्रमों से जुड़ी रही हैं। V4U रेडियो में एक आधिकारिक रेडियो जॉकी के रूप में आप साहित्यिक कार्यक्रमों का सफल संचालन कर रही हैं। आपने अनेक प्रतिष्ठित कलाकारों के साक्षात्कार लेकर साहित्यिक जगत में विशेष पहचान बनाई है। आपको “अहिल्याबाई होल्कर पुण्यश्लोका पुरस्कार” सहित कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2026 में ‘शारदा-रामनाथ कर्मयोगी सम्मान’ से सम्मानित होने जा रही सुरेखा अग्रवाल ‘स्वरा’ साहित्य जगत की प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व हैं।

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