Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
गाँव के घर के बाहर प्रतीक्षा करते बुजुर्ग माता-पिता और मिट्टी, पेड़ों व अपनापन से भरा ग्रामीण दृश्य।

चलो चलें अब गाँव

यह कविता गाँव की मिट्टी, रिश्तों की गर्माहट और अपनों के स्नेह की ओर लौटने की भावनात्मक पुकार है। शहर की भागदौड़ में छूट गए गाँव, बूढ़े माता-पिता और सूने खलिहानों की याद मन को बार-बार अपनी जड़ों की ओर खींचती है। कविता बताती है कि गाँव में रिश्ते दिखावे से नहीं, बल्कि विश्वास और प्रेम से निभाए जाते हैं, जहाँ सुख-दुख बाँटकर जीवन जिया जाता है। पीपल, बरगद और आम की छाँव, शुद्ध हवा और मिट्टी का सहज स्पर्श उस आत्मीय सुख का एहसास कराते हैं, जो कहीं और दुर्लभ है।

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पेड़ के नीचे ध्यान में बैठा व्यक्ति और सामने प्रकाश रूप में प्रकट चेतना, आत्मसंवाद और आंतरिक शांति का प्रतीक

चेतना और मनुष्य का संवाद

यह रचना मनुष्य और उसकी चेतना के बीच एक गहन संवाद को प्रस्तुत करती है, जहाँ आत्ममंथन, मोह, विरक्ति और जीवन के सत्य पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। यह केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा है, जो व्यक्ति को स्वयं से साक्षात्कार की ओर ले जाती है।

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जन्म एक मां का…

बच्चे का जन्म केवल एक नए जीवन का आगमन नहीं होता, बल्कि उसी क्षण एक औरत का भी पुनर्जन्म होता है — एक मां के रूप में। मातृत्व का यह चमत्कार औरत के भीतर प्रेम, त्याग और जिम्मेदारी की एक नई दुनिया खोल देता है। जैसे-जैसे बच्चा सीखता है, वैसे-वैसे मां भी सीखती है; यही जन्म का दूसरा चमत्कार है — एक मां का अवतरण।

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रीमा राय सिंह बनीं राष्ट्रीय कवि संगम मुंबई की नई अध्यक्ष

राष्ट्रीय कवि संगम की मुंबई महानगर इकाई के पुनर्गठन समारोह में विश्वप्रसिद्ध संगीतकार सरदार कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में श्रीमती रीमा राय सिंह को नई अध्यक्ष घोषित किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि रीमा जी के नेतृत्व में इकाई ‘राष्ट्र जागरण धर्म हमारा’ के ध्येय वाक्य को सार्थक करेगी। कार्यक्रम में अनेक प्रसिद्ध कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

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हिंदी भाषा, हिंदी बोली

हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। कविताएँ, कहानियाँ और शास्त्रिक ज्ञान इसे जीवंत बनाते हैं। इसकी मधुर ध्वनि, सरल व्याकरण और शृंगारी रूपरेखा भावनाओं को सीधे हृदय तक पहुँचाती हैं। हिंदी हमें भारतीय संस्कृति, ज्ञान और प्रेम से जोड़ती है, और यह भाषा हमारी पहचान और गर्व का प्रतीक है।

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