
अर्पणासिंह अर्पी, रांची
दिखाकर स्वप्न आँखों को चुराया आपने हमको,
जगाकर प्रीति उर में अपनाया आपने हमको।
नहीं कोई अंदेशा था, समय ये दिन दिखाएगा,
निराले प्रेम के पथ पर चलाया आपने हमको।
थामकर हाथ हाथों में, बढ़ाया हौसला मेरा,
उजाला प्रेम का शाश्वत दिखाया आपने हमको।
कभी राधा, कभी मीरा, जिन्होंने लौ लगाई थी,
बसा है प्रेम में ईश्वर बताया आपने हमको।
सदा उठता विचारों का बवंडर, चैन खो जाता,
उसी तूफ़ान से आखिर बचाया आपने हमको।
उतारेंगे किसी दिन आपका अहसान जीवन में,
निभाया किस तरह जाता, सिखाया आपने हमको।

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