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सिंहस्थ-2028 की तैयारी पर संतों की मुहर

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के दौरान शिप्रा नदी के घाटों का निरीक्षण करते साधु-संत और अधिकारी 📝 Social Media Caption

प्रशासन की रफ्तार पर जताया भरोसा

उज्जैन. सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे साधु-संतों ने प्रशासन के कामकाज पर संतोष जताया और घाट निर्माण की तेज गति की सराहना की. हालांकि इस निरीक्षण के दौरान शैव अखाड़ों के संतों की अनुपस्थिति ने नई चर्चा को जन्म दिया.

गुरुवार को वैष्णव अखाड़ों से जुड़े संतों ने त्रिवेणी घाट से निरीक्षण की शुरुआत की. इसमें डॉ. रामेश्वर दास, महावीरनाथ, सत्यानंद महाराज सहित कई संत शामिल रहे. संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने संतों को जानकारी दी कि सिंहस्थ में लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जिसके लिए 29 किलोमीटर लंबे घाट तैयार किए जा रहे हैं.

प्रशासन के अनुसार अब तक 42 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और घाटों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है. इसमें आरामदायक सीढ़ियां, रैंप और सुरक्षा के लिए रेलिंग शामिल हैं, ताकि दिव्यांग और बुजुर्ग भी आसानी से स्नान कर सकें.

निरीक्षण के दौरान संतों को कान्ह डक्ट परियोजना भी दिखाई गई, जिसके जरिए कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोका जाएगा. इस योजना के तहत गंदे पानी को भूमिगत सुरंग के माध्यम से गंभीर नदी की डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जाएगा.

संतों ने इस पूरी तैयारी को सराहनीय बताते हुए कहा कि उज्जैन इस बार नया इतिहास रच सकता है. उन्होंने यह भी माना कि काम की गुणवत्ता और गति पहले के मुकाबले बेहतर है और समय से पहले पूरा होने की संभावना है.

हालांकि इस पूरे दौरे में शैव अखाड़ों के संत शामिल नहीं हुए, जिससे आयोजन की एकजुटता को लेकर सवाल भी उठे. कुछ संतों ने इसे सूचना न मिलने का कारण बताया, लेकिन यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा.

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में संत समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए उनके सुझावों को भी योजना में शामिल किया जा रहा है. कुल मिलाकर तैयारियों की रफ्तार और संतों की संतुष्टि से यह संकेत मिल रहा है कि सिंहस्थ-2028 को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रयास तेज हो चुके हैं.

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