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उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के दौरान शिप्रा नदी के घाटों का निरीक्षण करते साधु-संत और अधिकारी 📝 Social Media Caption

सिंहस्थ-2028 की तैयारी पर संतों की मुहर

प्रशासन की रफ्तार पर जताया भरोसा उज्जैन. सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे साधु-संतों ने प्रशासन के कामकाज पर संतोष जताया और घाट निर्माण की तेज गति की सराहना की. हालांकि इस निरीक्षण के दौरान शैव अखाड़ों के संतों की अनुपस्थिति ने नई चर्चा को जन्म दिया. गुरुवार को वैष्णव अखाड़ों से जुड़े…

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उज्जैन फिर उज्जयिनी हो जाए

उज्जैन को उज्जयिनी नाम से फिर पहचान दिलाने का प्रयास चल रहा है — एक ऐसी नगरी जो विक्रमादित्य की राजधानी रही, कालिदास और भर्तृहरि की कर्मभूमि रही और जिसे साहित्य, ज्योतिष, संस्कृति और खगोल-विज्ञान की जन्मस्थली माना गया। पंडित सूर्य नारायण व्यास ने विक्रमादित्य की विरासत और उज्जयिनी के गौरव को पुनर्स्थापित करने में महती भूमिका निभाई। आज उज्जैन धार्मिक पर्यटन का केंद्र तो बन गया है, लेकिन उस उज्जयिनी का साहित्यिक, सांस्कृतिक वैभव खोता जा रहा है। अब समय है कि उज्जयिनी को उसका प्राचीन गौरव फिर से मिले — नाम से, संवत् से और सांस्कृतिक पहचान से।

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