उज्जैन हादसा: बंद कमरे में गेहूं से निकली गैस से बच्चों की तबीयत बिगड़ी

बंद कमरे में गेहूं बना जानलेवा

उज्जैन में बंद कमरे में रखे गेहूं में डाली गई कीटनाशक दवा से निकली जहरीली गैस ने दो मासूम बच्चियों की जान ले ली। वेंटिलेशन की कमी के कारण गैस कमरे में भर गई, जिससे चार बच्चे बीमार हुए, जिनमें से दो की मौत हो गई। यह घटना घरेलू स्तर पर कीटनाशकों के उपयोग में सावधानी की गंभीर चेतावनी है।

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उज्जैन में पुलिस द्वारा 3 किलो डोडाचूरा के साथ पकड़ा गया तस्कर और जब्त बाइक

मंदसौर से उज्जैन तक डोडाचूरा तस्करी का नेटवर्क उजागर

एक साधारण डिलेवरी का इंतजार कर रहा युवक पुलिस के लिए बड़े खुलासे की कड़ी बन गया. बड़नगर पुलिस ने 3.125 किलो डोडाचूरा के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिससे अब पूरे नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद बढ़ गई है.

पुलिस के अनुसार आरोपी मौलाना ब्रिज के पास ग्राहक का इंतजार कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई. भागने की कोशिश के बावजूद घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया.

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उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के दौरान शिप्रा नदी के घाटों का निरीक्षण करते साधु-संत और अधिकारी 📝 Social Media Caption

सिंहस्थ-2028 की तैयारी पर संतों की मुहर

प्रशासन की रफ्तार पर जताया भरोसा उज्जैन. सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे साधु-संतों ने प्रशासन के कामकाज पर संतोष जताया और घाट निर्माण की तेज गति की सराहना की. हालांकि इस निरीक्षण के दौरान शैव अखाड़ों के संतों की अनुपस्थिति ने नई चर्चा को जन्म दिया. गुरुवार को वैष्णव अखाड़ों से जुड़े…

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उज्जैन में महाकाल मंदिर क्षेत्र और चल रहे विकास कार्यों का आधुनिक दृश्य

महाकाल नगरी का कायाकल्प: विकास की तेज चाल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए शहर में सड़कों, पुलों, घाटों और इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़े स्तर पर विस्तार किया जा रहा है
वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा का यह लेख उज्जैन के बदलते स्वरूप और विकास योजनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

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संगीत सूर्य केशवराव भोसले का 105वाँ स्मृति दिवस मनाया गया

मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक परिषद द्वारा संगीत सूर्य केशवराव भोसले के 105वें स्मृति दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि, लघु कथाकार और समीक्षक श्री संतोष सूपेकरजी ने छात्राओं को भोसले जी की अविस्मरणीय नाट्य परंपरा से परिचित कराते हुए युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। भोसले जी मराठी संगीत नाटक के सुप्रतिष्ठित कलाकार थे, जिन्होंने कम उम्र में नाट्य जगत में प्रवेश किया, नारी पात्रों की भूमिका निभाई और अनेक महत्वपूर्ण प्रयोगों से मराठी रंगभूमि के संगीत नाटक के सुवर्णकाल को पुनर्जीवित किया। उनके योगदान ने नाट्य, संगीत और सिनेमा में अमूल्य छाप छोड़ी। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत रंगारंग कार्यक्रम और संस्था की प्रमुखों के उद्बोधन ने इस स्मृति दिवस को यादगार बनाया।

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