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महाकाल नगरी का कायाकल्प: विकास की तेज चाल

उज्जैन में महाकाल मंदिर क्षेत्र और चल रहे विकास कार्यों का आधुनिक दृश्य मुख्यमंत्री मोहन यादव के सपनों का उज्जैन (एआई इमेज)

मोहन यादव जैसी तेज चाल से तो पहले कोई सीएम नहीं चला

कीर्ति राणा, वरिष्ठ पत्रकार, उज्जैन

कुछ साल पहले तक उज्जैन के आमजन की मानसिकता ऐसी थी कि विवाह के लिये सूट-साड़ी-जूते तक खरीदने इंदौर का रुख करते थे। जिस तरह प्रमुख देवी स्थलों को लेकर दिन में तीन बार रूप बदलने की मान्यता है, दो साल में महाकाल की नगरी भी कुछ इसी तरह रूप बदल रही है। मप्र में मुख्यमंत्री तो पहले भी हुए हैं किंतु प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उज्जैन ही नहीं प्रदेश के विकास को लेकर जितनी तेज चाल है, उनसे पहले मप्र का कोई सीएम इतना तेज नहीं चला।
इस प्राचीनतम शहर की पहचान महाकाल की नगरी के रूप में तो है ही लेकिन महाकाल के इस बेटे ने विश्व पटल पर अपने उज्जैन को इन दो वर्षों में सीएम सिटी के रूप में स्थापित कर दिया है। निरंतर डेवलपमेंट का ही जजमेंट कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी हों या गृह मंत्री अमित शाह उनकी गुड बुक में उनका नाम दर्ज है। यह भी संकेत मिलता रहा है कि मध्य प्रदेश और मोहन यादव एक दूसरे के पूरक हैं।
सिंहस्थ तो हर 12 वर्ष में होता ही रहा है, 2028 का सिंहस्थ इसलिये खास है कि सीएम के गृह नगर में होगा और मोहन यादव खुद शंकराचार्य, तेरह अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर सहित साधु-संतों के साथ ही करोड़ों श्रद्धालुओं की अगवानी भी करेंगे।स्थानीय निवासियों के लिये उनका सीएम होना इसलिये खास है कि उन्होंने इन दो वर्षों में बता दिया है कि उज्जैन का कायाकल्प करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पूरे शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण आमजन से लेकर कारोबारी तक आज परेशानी जरूर उठा रहे हैं किंतु वे जानते हैं कि सरकार ये सारे काम किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बल्कि भविष्य के उज्जैन को इंदौर से भी आगे ले जाने के लिए कर रही है।वैश्विक पटल पर उज्जैन को धार्मिक नगरी के रूप में मिली मान्यता के साथ सिंहस्थ-28 के आगमन तक यह शहर औद्योगिक और कारोबारी शहर के रूप में भी स्थापित हो जाएगा।
यह सही है कि उज्जैन को पहले भी राज्य और केंद्र में प्रतिनिधित्व मिला किंतु उज्जैन के विजनरी नेता के रूप में कोई नाम विशेष रूप से उभर कर नहीं आया। कई नेताओं ने राज्य और केंद्र में भूमिका निभाई किंतु इस शहर के लोगों ने विकास की जो ललक मोहन यादव में देखी है पहले किसी में नहीं दिखी।आमसभा में उन्हें सीधे लोगों से जुड़ना आता है, उनकी बातें धार्मिक-पौराणिक आख्यानों से जुड़ी होने के कारण लोगों पर सम्मोहन करती हैं। सहज रूप से बात करते-करते कब वो प्रशासनिक अधिकारियों को लपेटे में ले लेते हैं यह हाल की कुछ घटनाओं में लोगों ने उनकी सख्ती की सराहना भी की है। जिससे यह धारणा भी कमजोर हुई है कि सरकार अफसरों पर अंकुश नहीं रख पाती ।
उनकी टीम के अनुभवी अधिकारियों ने घोषणाओं पर त्वरित अमल कर यह भरोसा भी जगाया है कि मन में कुछ कर दिखाने का उत्साह हो तो हर परेशानी का हल निकल सकता है, केंद्रीय नेतृत्व भी हर योजना के लिये धन की मंजूरी में उदारता दिखाता है। मप्र के उज्जैन में ट्रिपल इंजिन वाली ऐसी नगर सरकार है जहां नगर निगम महापौर का दायित्व सीएम की बड़ी बहन कलावती यादव 54 वार्ड संभाल रही हैं और छोटे भाई के जिम्मे गृह जिला होने से उज्जैन के तो वारे-न्यारे होना ही हैं।
बाकी प्रदेश के लिए वो सीएम साब होंगे लेकिन उज्जैन की गली-चौराहे के लिए तो वे आज भी ‘पहलवान’ हैं। विकास उनकी पहचान बन चुका है फिर भी सहजता बरकरार है-किसी भी चौक पर लोगों की बात सुनना हो, ‘राहगिरी’ में भाग लेना हो, किसी परिचित की परेशानी जानने के लिए कंधे पर हाथ रख कर उसकी बात सुनना हो, महाकाल की सवारी में डमरु बजाना हो या धार्मिक यात्रा में सक्रिय भागीदारी। उनके चेहरे पर की मुस्कान में पद का अहंकार नहीं झलकता।
मप्र में सिंहस्थ कराने का श्रेय हर बार भाजपा को मिलता रहा है किंतु इस इस बार एक अलग भाव जुड़ा है मोहन यादव ही इस महापर्व के सारथी होंगे।उनका लक्ष्य है कि उज्जैन का इंफ्रास्ट्रक्चर मेट्रो शहर के हिसाब से हो ताकि धार्मिक पर्यटन की गति भी उसी अनुपात में बढ़े। महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र और महाकाल लोक तक पहुंचने वाली सड़कों का चौड़ीकरण सिंहस्थ-28 के दौरान आने वाली भीड़ को सुगमता देगा।

🔹इस बार पूरी हो जाएगी सिंहस्थ में क्षिप्रा के जल में स्नान की इच्छा
इस बार सिंहस्थ में वाहनों से आने वाले असंख्य श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कार्यों के लिए 20 हजार करोड़ रु मंजूर किए गए हैं। सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं की यह शिकायत रही है कि क्षिप्रा का जल सतत प्रवाहित नहीं होता और उन्हें टैंकरों से छोड़े जाने वाले पानी से संतोष करना पड़ता है। इस बार क्षिप्रा सतत प्रवाहमान रहे इसके लिए 900 करोड़ वाली कान्ह डक्ट और 700 करोड़ वाली सेवरखेड़ी योजना पर काम शुरु हो गया है।
विश्व भर से आने वाले श्रद्धालुओं को सिंहस्थ के दौरान बेहतर प्रबंध प्रयागराज कुंभ से उन्नीसे नहीं लगें इस लिहाज से रीवर फ्रंट योजना के तहत क्षिप्रा के दोनों किनारों पर 9 किलोमीटर लंबे घाटों की लंबाई बढ़ाकर 29 किलोमीटर की जा रही है यानी 38 किलोमीटर तक फैले घाटों पर स्नान की सुविधा हो जाएगी।
इसी के साथ शहर के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले 19 नए पुल बनाने का काम भी चल रहा है। इनमें से 12 पुल तो क्षिप्रा नदी बहाव क्षेत्र पर ही निर्मित किए जा रहे हैं, 7 रेलवे ओवर ब्रिज भी निर्माणाधीन हैं। ऐतिहासिक कोठी भवन को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत वीर भूमि संग्रहालय में तब्दील करने के लिए 40 करोड़ के काम चल रहे हैं। उज्जैन को अन्य शहरों-राज्यों से जोड़ने वाले मार्गों को हाइवे, बायपास, सिक्स लेन में सिंहस्थ से पहले निर्मित कर लिए जाएंगे।
प्रमुख निर्माण कार्यों की बात करें तो-
•इंदौर से उज्जैन तक 1800 करोड़ की लागत से सिक्स लेन बन रहा है।
•इंदौर में पितृपर्वत से चिंतामण तक 2400 करोड़ से ग्रीन फिल्ड फोर लेन बनाया जा रहा है।
•उज्जैन से जावरा तक 2400 करोड़ से 98.650 किमी लंबे ग्रीन फिल्ड हाईवे का काम जारी है।
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