सच में वही दीपावली होगी

ज्योति सोनी “वैदेही ” अलवर ,राजस्थान

दीपावली, अंधेरे रूपी शत्रु के विरोध में सैकड़ों दियों की क्रांति का त्यौहार है। किस तरह नन्हे-नन्हे दिए, अपने साहस को समेटकर पूरी शक्ति और हिम्मत से उस अंधेरे को चीरते हुए धीरे-धीरे जलते हैं, जिसने उन्हें चारों ओर से घेर रखा है।

उस कमजोर सी बाती में कितनी ताकत का भंडार होता है, जो अपनी अंतिम सांस तक भी प्रकाश फैलाकर उस अंधेरे से निरंतर जूझती रहती है।

एक दिए का उजाला भले पर्याप्त न हो, मगर सैकड़ों दियों की एकता अनायास ही सौम्य ऊर्जा से पूरा उजाला फैलाने में सक्षम है।

क्या आपको नहीं लगता? हमें भी उन दियों की प्रबल शक्ति से सीख लेते हुए अपनी समस्त इच्छा-शक्ति और हिम्मत को बटोरकर, साहस का तेल डालते हुए, मेहनत की बाती का प्रकाश अपने जीवन में व्याप्त अशिक्षा, कुप्रथाओं, मानसिक विकृति या संकीर्ण सोच रूपी अंधेरे को मिटाने के लिए प्रयोग करना चाहिए।

तमाम मतभेद भुलाते हुए परिवार, समाज या देश हित हेतु एकता का परिचय देना चाहिए। क्यों न जीवन में मुसीबत, परेशानियों और कष्ट के अंधेरों को अंत तक चीरने का प्रयास किया जाए, ताकि मनुष्य जन्म सार्थक सिद्ध हो सके और सच में असली दीपावली वही होगी।

10 thoughts on “सच में वही दीपावली होगी

    1. उत्तम
      दीपावली को सार्थक बनाने हेतु उत्तम संदेश। प्रत्येक व्यक्ति अपने प्रयास से एक नई दिशा दे सकता है।

  1. बिल्कुल सत्य वचन है l छोटी-छोटी चीजें भी मील का पत्थर साबित होती हैं l

  2. इससे साबित होता है कि अनेकता में एकता होती है l बेशक बिखरे-बिखरे रहो परंतु जहां सहयोग की बात आये तो मिल जाना चाहिए

  3. वाह क्या खुबसुरती है दिवाली की

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *