ज़िंदगी आखिर कट ही जाएगी

ज़िंदगी अंत में कट ही जाती है चाहे हम मोहब्बत में डूबे हों या किसी की नफ़रत से लड़ रहे हों। कभी दर्द के साये में गुज़रती है, तो कभी हँसी की छोटी-सी किरण उसे रोशन कर देती है।
जीवन की यही सच्चाई है: दो पल का सफ़र, जो हाथ से फिसलते हुए भी हमें कुछ सिखा जाता है। खुशियाँ छोटी हों या बड़ी, बाँट देने से ही दिल हल्का होता है। ग़मों को अंदर दबाकर रखने से वे बोझ बन जाते हैं लेकिन किसी अपने के साथ उन्हें साझा कर लिया जाए तो वही दर्द ताकत में बदल जाता है।

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रंग–रंग में बसा जीवन

जीवन को रंगों ने हमेशा ही नए अर्थ और नई दिशा दी है। लाल रंग माँ की बिंदी की तरह स्नेह और खुशियों का संदेश देता है, हरा रंग धरती की हरियाली बनकर मन में शीतलता और समृद्धि का भाव जगाता है। नीला रंग आसमान की तरह मन को उड़ान और शांति दोनों देना जानता है, जबकि सफ़ेद रंग सरस्वती की पवित्रता में ज्ञान और सादगी का प्रतीक बन जाता है। भगवा रंग सनातन संस्कृति की जड़ से जोड़कर जीवन में अनुशासन और संस्कारों का उजास भरता है। हर रंग अपनी अलग महिमा लिए हुए है और हर रंग जीवन को किसी न किसी रूप में सम्पन्न और सार्थक बनाता है।

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तेरे हवाले है सब

प्रभु, तू ही वह शक्ति है जिसने जीवन के खेल रचे। सब कुछ तेरे हवाले है — चाहे कैसे भी हो, मैं जानता हूँ कि सब तेरी योजना के तहत है।
जब भी दिल से तुझे पुकारा, तूने आवाज़ सुनी और हर मुश्किल में मुझे संभाला। तेरे दम से ही हमारे मंदिर खड़े हैं, शिवालयों की शान बनी है।
तू खुशियों के साथ दुख भी देता है, पर वही जीवन में अंधेरे में उजाले भी बन जाता है। भटकते राहों पर तूने रास्ता दिखाया, और जब हम बिखरे, तूने ही हमें फिर से जोड़कर संभाला।

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कब तक रहोगे चुप-चुप यूँ…

कब तक हम चुप रहेंगे? समय आ गया है कि हम अपनी ज़ुबान खोलें और केवल श्रृंगार-रस में खोए रहने के बजाय वीरता का स्वर बुलंद करें। चारों ओर रक्त बह रहा है, हालात भयावह हो चुके हैं, और हमें शत्रुओं की चालों को तोड़ने के लिए नई युक्तियाँ ढूँढ़नी होंगी।

आज बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं। भेड़िए जैसी नज़रें हर ओर लगी हुई हैं, और माँओं की नींद उड़ चुकी है। आँखें मूँदकर अब और चुप नहीं रहा जा सकता।
हर दिन आपसी बैर और नफ़रत बढ़ाने की साज़िशें होती रहती हैं। यह समय है कि हम किसी बहकावे में न आएँ और नफ़रत की दीवारें तोड़ दें। श्रोताओं को भी सुनकर अमल करना होगा और कवियों को केवल कहने भर पर नहीं, बल्कि पालन करने पर भी ज़ोर देना होगा। तभी शब्दों की असली शक्ति सामने आएगी और बंद पड़े हृदय खुल पाएँगे।

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आत्मसंतुष्टि

बरसों बाद जब रेणू ने कलम उठाई, उसके दिल और दिमाग में अजीब सी मस्ती फैल गई। शब्दों का सागर उसके भीतर गोते लगा रहा था, और दिमाग उस सागर से मोती चुनकर उन्हें पंक्तियों में सजाने में व्यस्त था। भावनाओं की लहरें उठ रही थीं, और उसकी नाव—जो कविता का रूप धारण कर चुकी थी—उन लहरों को पार कर रही थी। हर शब्द, हर भाव उसे आत्मसंतुष्टि के द्वार तक ले गया। रेणू ने महसूस किया कि लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा की शांति का साधन भी है। उसकी नाविक बनकर, वह अपनी रचनात्मकता की शक्ति को महसूस करते हुए आत्मसंतुष्टि के द्वार पर पहुँच गई।

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हमको सूरज है बनना

“हमको सूरज है बनना—चाहे जलना पड़े। अंधकार दूर भगाना, पाप मिटाना और जीवन में प्रकाश फैलाना ही हमारा प्रण है। यह कविता साहस, एकता और सेवा की प्रेरणा देती है।”

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नवरात्रि: भक्ति से शक्ति की यात्रा

“नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है। यह हमें हमारे भीतर की सुप्त शक्ति को पहचानने, हर कठिनाई में छिपे वरदान को देखने और आत्मविश्वास से अंधकार को मिटाने की प्रेरणा देता है।”

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सच में वही दीपावली होगी

ज्योति सोनी “वैदेही ” अलवर ,राजस्थान दीपावली, अंधेरे रूपी शत्रु के विरोध में सैकड़ों दियों की क्रांति का त्यौहार है। किस तरह नन्हे-नन्हे दिए, अपने साहस को समेटकर पूरी शक्ति और हिम्मत से उस अंधेरे को चीरते हुए धीरे-धीरे जलते हैं, जिसने उन्हें चारों ओर से घेर रखा है। उस कमजोर सी बाती में कितनी…

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गहना

यदि तुम्हें गहना पहनना है तो बेशक पहनो, लेकिन उस नगीने को मत खोना, जिसकी पहचान समय ने तुम्हें बड़ी मुश्किल से कराई है। अब कुदालों की बाट देखना बंद करो और अपनी सुइयाँ उठाओ—वे सुइयाँ जिन्हें जन्म लेते ही तुम्हारे हाथों में थमाया गया था। जब प्यास बढ़े, तो इधर-उधर ताकना मत, बल्कि अपनी तुरपाई वाली सुइयाँ पैनी करो। उसी से निर्मल जल का स्रोत मिलेगा, कुआँ खुदो और अपनी प्यास बुझाओ। इतना करने के बाद भी जीत का जश्न मनाना मना है। जीत की सांसों में हार को भी पहचानो, जो तुम्हें सबसे भावुक पलों में पटखनी देती आई है। इस बीच, ओढ़ लो अपना आत्मविश्वास और अपने सबसे थके हुए दिन को अमर बना दो। जीवन का अभियान सालों में नहीं, बल्कि प्रत्येक दिन में छिपा है। यही सोचकर जीवन की धूप मांग लो और उसे अपने लिए माँगटीका बना दो। सबसे जरूरी है कि तुम अपने लिए हमेशा सुहागिन बने रहो।

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नारी

नारी केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि जीवन का उद्घोष है। नारी कई रूपों में विघटित है, गणना से परे, क्योंकि इसके रूप तो अगणित हैं। आज नारी अबला नहीं, बल्कि सबला बनकर अपने अधिकार और सम्मान के परचम लहरा रही है।

पुरुष प्रधान जगत में नारी अब पुरुष से कम नहीं है। नारी पृथ्वी की शक्ति है; बिना नारी के जगत शक्ति विहीन है। संपूर्ण सृष्टि में नारी के बिना सब कुछ ही अधूरा और स्तरहीन है। नारी केवल कामिनी नहीं, शस्त्र-शास्त्र की पर्याय है। नारी केवल जन्मदाता नहीं, बल्कि कभी-कभी मृत्यु भी बन जाती है।

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