
मेघा अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, नागपुर (महाराष्ट्र)
प्यार करते-करते या नफ़रत करते-करते,
दुःख सहते-सहते या फिर हँसते-हँसते
जैसे काटोगे, कट ही जाएगी ज़िंदगी।
जीवन दो पल का है, फिर हाथ न आएगी ज़िंदगी।
कुछ खुशियाँ बाँटो, कुछ ले लो उधार,
आहें मत भरो, कुछ ग़मों को
साँझा करो, दिल को करो हल्का,
लबों पर मुस्कान धरो
जीवन दो पल का है, फिर हाथ न आएगी ज़िंदगी।
माना जीवन कठिन है, पर मुश्किल कुछ भी नहीं।
मन को मज़बूत बना, हौसलों की उड़ान भर,
जीवन की पतवार थाम, काट ले ज़िंदगी।
जीवन दो पल का है, फिर हाथ न आएगी ज़िंदगी।
हर तरफ मुस्कान बिखेर, उदासी दूर कर,
हर कोई तुझको याद करे, ऐसा काम कर।
मरकर भी तू यादों में याद आए
ऐसा कोई काम कर।
जीवन दो पल का है, फिर हाथ न आएगी ज़िंदगी।

बहुत ख़ूब 👌👌