नया दिन, नई आशा
सूरज की कोमल किरणों के साथ नया दिन, नई आशा और उमंग लेकर आता है। प्रकृति की हरियाली, कल-कल करती नदियाँ और चहकती चिड़ियाँ जीवन में प्रेरणा और ऊर्जा भरती हैं। साहस और मेहनत के साथ हर चुनौती को पार करना ही सफलता का मार्ग है।”

सूरज की कोमल किरणों के साथ नया दिन, नई आशा और उमंग लेकर आता है। प्रकृति की हरियाली, कल-कल करती नदियाँ और चहकती चिड़ियाँ जीवन में प्रेरणा और ऊर्जा भरती हैं। साहस और मेहनत के साथ हर चुनौती को पार करना ही सफलता का मार्ग है।”
कहते हैं कि कलियुग आ चुका है, लेकिन अब लगता है कि वह चारों दिशाओं में फैलकर मनुष्य के भीतर गहराई तक उतर चुका है। रिश्तों में विष घुल गया है भाई भाई का नहीं रहा, माँ घर की देहरी से बाहर धकेल दी गई, और धन ही सम्मान का नया मापदंड बन गया। समाज में भय, हिंसा, लोभ और छल ऐसी सहजता से घुलमिल गए हैं कि कोई उन्हें असामान्य भी नहीं मानता। प्रकृति भी जैसे मनुष्यों के पापों की साक्षी बनकर अपना क्रोध दिखा रही है नदियाँ मार्ग बदल रही हैं, वर्षा अनियंत्रित हो रही है और जीवन असुरक्षा में डूबता जा रहा है।
ज़िंदगी अंत में कट ही जाती है चाहे हम मोहब्बत में डूबे हों या किसी की नफ़रत से लड़ रहे हों। कभी दर्द के साये में गुज़रती है, तो कभी हँसी की छोटी-सी किरण उसे रोशन कर देती है।
जीवन की यही सच्चाई है: दो पल का सफ़र, जो हाथ से फिसलते हुए भी हमें कुछ सिखा जाता है। खुशियाँ छोटी हों या बड़ी, बाँट देने से ही दिल हल्का होता है। ग़मों को अंदर दबाकर रखने से वे बोझ बन जाते हैं लेकिन किसी अपने के साथ उन्हें साझा कर लिया जाए तो वही दर्द ताकत में बदल जाता है।
सूखी धरती मेघों को पुकार रही है. प्यासे खेत, तड़पते किसान और तपन से झुलसी दुनिया बादलों से जीवन-वर्षा की विनती करती हुई।
रात की नीरवता में मन बार-बार किसी अज्ञात उपस्थिति को महसूस करता है. जैसे कोई अदृश्य कदमों से मन के आँगन तक आ पहुँचा हो। पहचान स्पष्ट नहीं, पर एहसास गहरा है। कोई है… जिसकी आहट, जिसकी परछाईं, जिसकी अनकही मौजूदगी दिल को बेचैन भी करती है और आकर्षित भी। मन बार-बार उसी ओर खिंचता है.
यह कविता जीवन की अंधेरी राहों में प्रेम, परिवार और आत्मबल की रोशनी तलाशती है। कवि कहता है. अंधेरे चाहे कितना भी घेर लें, हम एक-दूसरे को छोड़कर नहीं जाएंगे। थकी हुई आत्मा को सहारा देने के लिए सच्चा प्रेम ही पर्याप्त है। रिश्तों की डोर अगर प्यार से जोड़ी जाए तो परिवार हमेशा साथ रहता है। समय के कठिन क्षणों में सब साथ छोड़ जाते हैं, फिर भी प्रेम और आशा के सितारे जगमगाते हैं।
प्रभु, तू ही वह शक्ति है जिसने जीवन के खेल रचे। सब कुछ तेरे हवाले है — चाहे कैसे भी हो, मैं जानता हूँ कि सब तेरी योजना के तहत है।
जब भी दिल से तुझे पुकारा, तूने आवाज़ सुनी और हर मुश्किल में मुझे संभाला। तेरे दम से ही हमारे मंदिर खड़े हैं, शिवालयों की शान बनी है।
तू खुशियों के साथ दुख भी देता है, पर वही जीवन में अंधेरे में उजाले भी बन जाता है। भटकते राहों पर तूने रास्ता दिखाया, और जब हम बिखरे, तूने ही हमें फिर से जोड़कर संभाला।