
शालिनी खन्ना, प्रसिद्ध लेखिका एवं ज्योतिष विशेषज्ञ
जो खेल रचे तूने, प्रभु सबसे निराले हैं,
चाहे रख ले जैसे, अब तेरे हवाले हैं।।
जब भी दिल से चाहा, आवाज़ तू सुन लेता,
तेरे दम से ही तो, मंदिर व शिवालय हैं।।
है देकर खुशियों को, पल में दुख भी देता,
जीवन में अंधेरा भी, तुमसे ही उजाले हैं।।
है राह भटकते को, रास्ता दिखलाया है,
जब-जब हम बिखरे हैं, तूने ही संभाले हैं।।
देता पल में जो तू, तो छिन भी लेता है,
दानों पर लिख डाला, किस-किस के निवाले हैं।।
है पार करे नैया, मँझधार में जो डूबी,
मुख से जिसने प्यारे, हरि नाम निकाले हैं।।

है पार करे नैया, मँझधार में जो डूबी,
मुख से जिसने प्यारे, हरि नाम निकाले
बहुत सुंदर चित्रण शालिनी जी
अति सुन्दर