Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते जैन मुनिराज और श्रद्धापूर्वक उपस्थित श्रद्धालु।

मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान है, इसे व्यर्थ न गंवाएं

नागदा में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज श्री डॉ. संयमरत्न विजय जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान दुर्लभ है। उन्होंने जिनेंद्र भक्ति, वैरभाव त्याग और आत्मा को निर्मल बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म को जीवन का वास्तविक मार्ग बताया।

Read More

हे केशव, तेरी यह कैसी माया?

कभी साधारण जप सा लगता कृष्ण-नाम आज अचानक मन में तरंग बनकर उठा। जैसे ही भाव की एक बूंद हृदय में गिरी, भीतर का सारा सूखापन हर गया। लगा मानो केशव स्वयं दया कर उपस्थित हो गए हों। बरसों की पुकार, प्रतीक्षा और तड़प का उत्तर आज मिला। रोम-रोम भक्ति से भीग उठा यही क्षण जन्म का सार्थक होना है।

Read More

मन के भाव..

न के भीतर जन्म लेने वाले भाव ही रचना का आधार बनते हैं। रचनाकार हो, कलाकार हो या चित्रकार—हर सृजन उसी सूक्ष्म अनुभूति से आकार पाता है, जो मन में आहिस्ता से जन्म लेती है।
प्रकृति और परमात्मा ने इस सृष्टि में संतुलन रचा, पर जब मनुष्य अपने ही खुमार और कामना में डूब जाता है, तो यही संतुलन टूटने लगता है। जल, वायु और धरती का दूषित होना किसी बाहरी शत्रु की नहीं, बल्कि मानव की अपनी भूल की कहानी है।

Read More

कलियुग

कहते हैं कि कलियुग आ चुका है, लेकिन अब लगता है कि वह चारों दिशाओं में फैलकर मनुष्य के भीतर गहराई तक उतर चुका है। रिश्तों में विष घुल गया है भाई भाई का नहीं रहा, माँ घर की देहरी से बाहर धकेल दी गई, और धन ही सम्मान का नया मापदंड बन गया। समाज में भय, हिंसा, लोभ और छल ऐसी सहजता से घुलमिल गए हैं कि कोई उन्हें असामान्य भी नहीं मानता। प्रकृति भी जैसे मनुष्यों के पापों की साक्षी बनकर अपना क्रोध दिखा रही है नदियाँ मार्ग बदल रही हैं, वर्षा अनियंत्रित हो रही है और जीवन असुरक्षा में डूबता जा रहा है।

Read More

यक्ष प्रश्न

डॉक्टर की क्लीनिक में बैठकर हर बार वही विचार उमड़ते हैं—काश कुछ फैसले अलग लिए होते, कुछ कदम गलत न उठाए होते। कभी-कभी मन इतनी थकान से भर जाता है कि लगता है जैसे सन्त-महात्माओं जैसा शांत, संयमित जीवन ही समाधान हो। पर तभी खुद से सवाल उभरता है क्या वे भी कभी बीमारी से अछूते रहे होंगे? कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जिनका उत्तर न तो किसी किताब में मिलता है, न किसी प्रवचन में…..

Read More

रंग–रंग में बसा जीवन

जीवन को रंगों ने हमेशा ही नए अर्थ और नई दिशा दी है। लाल रंग माँ की बिंदी की तरह स्नेह और खुशियों का संदेश देता है, हरा रंग धरती की हरियाली बनकर मन में शीतलता और समृद्धि का भाव जगाता है। नीला रंग आसमान की तरह मन को उड़ान और शांति दोनों देना जानता है, जबकि सफ़ेद रंग सरस्वती की पवित्रता में ज्ञान और सादगी का प्रतीक बन जाता है। भगवा रंग सनातन संस्कृति की जड़ से जोड़कर जीवन में अनुशासन और संस्कारों का उजास भरता है। हर रंग अपनी अलग महिमा लिए हुए है और हर रंग जीवन को किसी न किसी रूप में सम्पन्न और सार्थक बनाता है।

Read More

आख़िर में…

ज़िंदगी भर मुखौटे पहनती रही. अच्छी बीवी”, “अच्छी बहू”, “बेबस मां” के।
नींद हमेशा अधूरी रही, काम हमेशा पूरे हुए।
जब आख़िरकार सुकून की नींद मिली, तब भी किसी ने झिंझोड़ कर जगा दिया।अब तो मैं बस यही कहना चाहती हूं . “मुझे अब तो सोने दो… अब कोई मुखौटा नहीं, कोई फ़र्ज़ नहीं. बस नींद।”

Read More

पुनर्जन्म…

बस से मसूरी की यात्रा पर निकली साक्षी अपने परिवार के साथ मंदिर पहुँचती है। जैसे ही वह मंदिर के अहाते में कदम रखती है, एक बूढ़ा व्यक्ति उसे देखकर दौड़ा चला आता है और कहता है — “बिटिया, तू आ गई! मैं तेरा इंतज़ार कर रहा था।”
सब हैरान रह जाते हैं। बूढ़ा एक पुरानी तस्वीर दिखाता है . उसमें साक्षी जैसी ही एक लड़की थी, नाम लिखा था “नूरी”। बूढ़े की आँखों में आँसू हैं, और साक्षी के मन में एक अनजाना कंपन।
क्या यह महज़ संयोग है, या सचमुच किसी पुनर्जन्म की कहानी शुरू हो चुकी है?

Read More
bhagwa- hindu -india

मैं ही ज्योति, मैं ही अनंत

जिसे तुम बाहर ढूँढते फिर रहे हो, वह सब तुम्हारे भीतर है। धरती के छोर से लेकर आकाशगंगाओं के पार तक, जो भी दिखाई देता है, वह उसी एक ऊर्जा की भिन्न–भिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं। सूर्य की गर्मी, चाँद की शीतलता, समुद्र की गहराई, हिमालय का शौर्य, गंगा की पवित्र धार सब उसी शक्ति के रूप हैं। वह शक्ति न किसी दिशा में सीमित है, न किसी समय में बँधी। वह अनंत है और सर्वव्यापी है। भगवा इसी अनंत प्रकाश का प्रतीक है .जो न कहीं शुरू होता है और न कहीं समाप्त।
जो इसे पा लेता है — वह समझ जाता है कि खोज बाहर नहीं, भीतर की ओर मुड़ने में है।
सब उसी से जन्मा है और अंततः उसी में विलीन होना है।

Read More

तेरे हवाले है सब

प्रभु, तू ही वह शक्ति है जिसने जीवन के खेल रचे। सब कुछ तेरे हवाले है — चाहे कैसे भी हो, मैं जानता हूँ कि सब तेरी योजना के तहत है।
जब भी दिल से तुझे पुकारा, तूने आवाज़ सुनी और हर मुश्किल में मुझे संभाला। तेरे दम से ही हमारे मंदिर खड़े हैं, शिवालयों की शान बनी है।
तू खुशियों के साथ दुख भी देता है, पर वही जीवन में अंधेरे में उजाले भी बन जाता है। भटकते राहों पर तूने रास्ता दिखाया, और जब हम बिखरे, तूने ही हमें फिर से जोड़कर संभाला।

Read More