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मन के भाव..

शोभा सोनी, लेखिका, बड़वानी (मध्यप्रदेश)

रचना रचे रचनाकार
मूरत गढ़े कलाकार
चित्र बनाये चित्रकार
हर कला को नमस्कार
श्रष्टि रचे परमात्मा
मनु बने जीवात्मा
सत्कर्म करे धर्मात्मा
प्रकृति दे प्राण साधना
परिपूर्ण हो आराधना
खुमार बने दुष्टात्मा
कुकर्म करे निज कामना
आघात हो जीव साधना
दूषित हो जलवायु धरा
मूर्छित हो सकल जीव चरा
समझो दर्द अब तो जरा
बृक्ष व्रद्दी करो निखरे धरा
जन जीवन हो पुनः हरा
मन भावो का है ये गजरा
बिखरे खुशबू जर्रा -जर्रा।

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