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तेरे हवाले है सब

प्रभु, तू ही वह शक्ति है जिसने जीवन के खेल रचे। सब कुछ तेरे हवाले है — चाहे कैसे भी हो, मैं जानता हूँ कि सब तेरी योजना के तहत है।
जब भी दिल से तुझे पुकारा, तूने आवाज़ सुनी और हर मुश्किल में मुझे संभाला। तेरे दम से ही हमारे मंदिर खड़े हैं, शिवालयों की शान बनी है।
तू खुशियों के साथ दुख भी देता है, पर वही जीवन में अंधेरे में उजाले भी बन जाता है। भटकते राहों पर तूने रास्ता दिखाया, और जब हम बिखरे, तूने ही हमें फिर से जोड़कर संभाला।

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माँ दुर्गा का आगमन

माँ दुर्गा के आगमन और नवरात्रि के उत्सव का सुंदर चित्रण करती है। कवि ने माँ के नौ रूपों के वास, भक्ति और श्रद्धा के भाव, तथा उनके दुष्टों के नाश करने वाले रूप का वर्णन किया है। भक्त अपनी विपत्तियों और संकटों में माँ के सामने आता है, उनका उद्धार माँ से आशा करता है। माँ का रूप लाल चुनर, मुकुट और त्रिशूल के साथ दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है, और उनकी ममता और करुणा हर भूल और त्रुटि को क्षमा करने वाली प्रतीत होती है। भक्तों द्वारा हलवा-पूरी और चना जैसे भोग अर्पित किए जाते हैं, और वे माँ से आशीर्वाद की कामना करते हैं। पूरी कविता में भक्ति, श्रद्धा और उत्सव का वातावरण स्पष्ट है, जो संसार को माँ के प्रति प्रेम और सम्मान से मोहित करता है।

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