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तेरे हवाले है सब

प्रभु, तू ही वह शक्ति है जिसने जीवन के खेल रचे। सब कुछ तेरे हवाले है — चाहे कैसे भी हो, मैं जानता हूँ कि सब तेरी योजना के तहत है।
जब भी दिल से तुझे पुकारा, तूने आवाज़ सुनी और हर मुश्किल में मुझे संभाला। तेरे दम से ही हमारे मंदिर खड़े हैं, शिवालयों की शान बनी है।
तू खुशियों के साथ दुख भी देता है, पर वही जीवन में अंधेरे में उजाले भी बन जाता है। भटकते राहों पर तूने रास्ता दिखाया, और जब हम बिखरे, तूने ही हमें फिर से जोड़कर संभाला।

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परवरिश…

परवरिश, दरअसल वह निरंतर साधना है जहाँ संतान रूपी बीज को हम प्रेम, स्नेह और संस्कार की सिंचाई से अंकुरित करते हैं। समय-समय पर उचित मार्गदर्शन और देखभाल से यह पौधा धीरे-धीरे एक ऐसे वृक्ष में बदलता है, जो भविष्य में न केवल जिम्मेदार और संवेदनशील होता है, बल्कि समाज और परिवार के लिए फलदायी भी सिद्ध होता है।

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शिक्षक का आशीर्वाद

बचपन में मैंने अक्सर शिक्षक बनने का खेल खेला था। आज समझ आता है कि वह खेल केवल खेल नहीं था, बल्कि एक गहरी सीख थी। शिक्षक होना वास्तव में प्रेम, धैर्य और आनंद की कला है। हर विद्यार्थी अलग होता है और उसके लिए नए ढंग से समझ का ताना-बाना बुनना पड़ता है।

शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान उसकी सरलता है—वह कठिन से कठिन विषय भी सहज तरीके से समझा देता है। यही ईश्वर का दिया हुआ अमूल्य उपहार है। गुरु और शिष्य का रिश्ता पवित्र और जीवनभर साथ रहने वाला होता है। गुरु का आशीर्वाद शब्दों से भी भारी है, क्योंकि वही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।

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