मौसमी चंद्रा एक उर्जावान और सशक्त रचनाकार है जिनकी लेखनी भावनाओं की गहराई और सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्र प्रस्तुत करती है. रचनाएँ न केवल पाठकों के दिल को छूती हैं, बल्कि उन्हें सोचने और आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करती हैं. मैंने अभी मौसमी चंद्रा का कहानी संग्रह सप्तपर्णी पढ़ना शुरु किया है. उसमें आत्मकथ्य में ही तारीख 1 जनवरी 2036 लिखी है. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मौसमी कितने आगे की सोच रखती हैं. इस पुस्तक को पढ़ते हुए सबसे पहली बात जो मुझे लगी वह है लेखिका की निष्कपट ईमानदारी.
जहाँ आज के दौर में कहानियाँ अक्सर कल्पना के ऊँचे शिखरों पर विचरती हैं, वहीं ये कहानियाँ ज़मीन से जुड़ी हुई और साधारण मनुष्य के अंतर्मन की गहराई को छूती हैं. भाषा के आडंबर के बिना सीधे सरल शब्दों में अपनी बात कहती है. उनकी कहानियों में प्रेम में मिलन से अधिक प्रतीक्षा के सत्य को स्वीकार करना अनूठी विशेषता है जो सिखाता है कि इंतज़ार भी खूबसूरत हो सकता है.
12 अप्रैल 1980 को पटना में जन्मी मौसमी चन्द्रा ने प्रारंभ से ही साहित्य के प्रति गहरी रुचि विकसित की. माता श्रीमती सरोज सिन्हा और पिता श्री अशोक कुमार सिन्हा के संस्कारों ने इनके व्यक्तित्व और रचनात्मकता को विशेष दिशा दी. आपने स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद साहित्य साधना को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया.
लेखन के क्षेत्र में इनकी पहचान एक बहुआयामी रचनाकार के रूप में स्थापित है. एकल कहानी और काव्य संग्रह टूटती साँकले, सप्तपर्णी, एक और अमृता तथा इश्क है कि जादू-टोना पाठकों के बीच विशेष रूप से सराहे गए हैं.
इसके अतिरिक्त, आपने बात अभी बाकी र्हैें, बसंत आने को है और कुल्हड़ भर कहानियां जैसे महत्वपूर्ण साझा संग्रहों का सफल संपादन भी किया है. आपकी रचनाएँ अनेक साझा संकलनों जैसे प्रतीक्षा में प्रेम, रत्नावली, अनंता, किस्सागो, गुंजित मौन, दीया और बाती और अब आ जाओ में प्रकाशित हो चुकी हैं. मौसमी चंद्रा की पाँच लघुकथाओं का नेपाली भाषा में अनुवाद भी हुआ है, जो इनकी लेखनी की व्यापकता और लोकप्रियता को दर्शाता है 300 से अधिक समाचार पत्रों में कविताएँ और कहानियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जो आपकी सृजनशीलता की निरंतरता का प्रमाण है. डिजिटल मंचों पर भी मौसमी चंद्रा की सक्रिय उपस्थिति है. इनके यूट्यूब चैनल किस्सा-कहानी, न्यूज़4एशिया, कथा कस्तूरी और प्रवासी संदेश पर श्रोता रचनाओं को इनकी आवाज़ में सुन सकते हैं, जो इनकी अभिव्यक्ति को और भी जीवंत बना देता है.
वर्तमान में आप महाराष्ट्र के दैनिक अखबार प्रवासी संदेश के यूट्यूब चैनल साहित्य प्रवासी की संपादिका के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ आप साहित्य को नई दिशा और व्यापक मंच प्रदान कर रही हैं.
मौसमी चन्द्रा का मानना है कि साहित्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है एक ऐसा माध्यम, जो संवेदनाओं को जागृत कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन की राह दिखाता है.
मौसमी चंद्रा: एक उर्जावान और संवेदनशील रचनाकार
मौसमी चन्द्रा

वैसे तो हम सभी मौसमी जी को जानते हैं लेकिन उनके बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए आपका आभार। मौसमी जी का विचार कि साहित्य सिर्फ शब्दों का सृजन नहीं समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है, बहुत ही प्रभावशाली और प्रेरणा दायक विचार है।
पूरी पढ़ ली 😊 बहुत सुंदर और विस्तृत परिचय। शुक्रिया livewire को और स्पेशल थैंक्स आपको Suresh Ji 🙏 मैं कुछ मामलों में बड़ी लकी हूं मुझे अच्छे लोग ज्यादा मिलते हैं। आपसे जुड़ना हर राइटर के लिए खुशी की बात होगी। साहित्य के क्षेत्र में नित नए प्रयोग करना और हम लेखकों के लिए इतना सोचना छोटी बात नहीं है। आपके लिए सम्मान थोड़ा और बढ़ गया🌼🌼