हौसले से दी हालात को मात और हासिल किया मकाम

हर महिला के भीतर एक सपना होता है अपनी पहचान बनाने का, अपने नाम से जाने जाने का. लेकिन कई बार जिम्मेदारियों, परिस्थितियों और अवसरों की कमी के बीच यह सपना कहीं दबकर रह जाता है. कुछ महिलाएँ इन हालातों को अपनी किस्मत मान लेती हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी होती हैं जो इन्हीं हालातों को अपनी ताकत बना लेती हैं. रुचि अग्रवाल उन्हीं जुझारू महिलाओं में से एक हैं.
सपनों की शुरुआत और जिम्मेदारियों की दीवार
रुचि अग्रवाल का जन्म और शिक्षा कोलकाता में हुई. एक छोटे से कस्बे में पली-बढ़ी रुचि के मन में भी बड़े सपने थे. कुछ कर दिखाने के, अपना नाम कमाने के. लेकिन कम उम्र में विवाह और फिर परिवार की जिम्मेदारियों ने उनके सपनों को जैसे रोक दिया. पति, घर और दो बच्चों की देखभाल करते-करते 15 साल कब बीत गए, पता ही नहीं चला. लेकिन इन वर्षों में भी उनके भीतर का सपना जिंदा रहाएक ऐसी पहचान की चाह, जो सिर्फ रिश्तों से नहीं, बल्कि उनके अपने काम से बने.
…जब उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी
लेखन का शौक उन्हें बचपन से था, लेकिन न तो कोई मंच मिला और न ही कभी उनके इस हुनर को गंभीरता से लिया गया.
धीरे-धीरे उनके मन में यह भावना घर करने लगी कि शायद जीवन एक साधारण गृहिणी बनकर ही बीत जाएगाबिना किसी पहचान के. यह हताशा इतनी गहरी थी कि उन्हें लगने लगा था. अब कुछ नहीं हो सकता.
कोरोना : आपदा में मिला अवसर
फिर आया कोरोना काल जो पूरी दुनिया के लिए मुश्किलों का समय था, लेकिन रुचि के लिए यह एक नई शुरुआत बन गया. उन्होंने हिम्मत करके एक राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन कविता प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. उन्हें नहीं पता था कि यह छोटा-सा कदम उनकी जिंदगी की दिशा बदल देगा. 2000 प्रतिभागियों के बीच 8वाँ स्थान हासिल करना उनके लिए सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का पुनर्जन्म था. इस सफलता के बाद लोगों ने उनकी लेखनी को सराहा, नए मंच मिलने लगे और धीरे-धीरे वे साहित्य की दुनिया में अपनी जगह बनाने लगीं.
उन्हें महसूस हुआ कि उनके भीतर जो प्रतिभा है, वह सच में कुछ खास है. आज रुचि अग्रवाल, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की निवासी हैं और लेखन व रचनात्मकता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं. वे गीत, लेख और कविताएँ लिखती हैं, साथ ही वीडियो निर्माण और एडिटिंग में भी दक्ष हैं.
इसके अलावा, वे एक प्रतिभाशाली वॉइस ओवर आर्टिस्ट भी हैं. रुचि ने खुद को सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने अपने दम पर वीडियो बनाना और एडिटिंग सीख लिया. छोटे-छोटे जिंगल्स से शुरू हुआ उनका सफर आज हर तरह के गीत लिखने तक पहुँच चुका है. रोमांटिक, रैप, हिप-हॉप और हिंदी-मारवाड़ी फ्यूजन तक.उन्होंने आर्टिकल लेखन में भी अपनी मजबूत पकड़ बना ली है.
उपलब्धियाँ जो पहचान बनीं
रुचि की एकल पुस्तक “बातें कुछ अनकही सी” प्रकाशित हो चुकी है और वे 25 से अधिक साझा संकलनों में अपनी सहभागिता दर्ज करा चुकी हैं. राष्ट्रीय स्तर की कविता प्रतियोगिता में 2000 प्रतिभागियों के बीच 8वाँ स्थान प्राप्त करना उनके सफर का अहम मोड़ रहा. उन्हें उनके साहित्यिक योगदान के लिए कई ट्रॉफी, मेडल और प्रमाण-पत्रों से सम्मानित किया जा चुका है.वे अंतरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच, चैतन्य काव्य मंच और देश-विदेश के कई ऑनलाइन काव्य मंचों से जुड़ी हुई हैं.
जुनून, जो आमदनी से ऊपर था…
रुचि मानती हैं कि लोग अक्सर काम पैसे कमाने के लिए करते हैं, लेकिन उन्होंने अपने काम की शुरुआत अपनी पहचान बनाने के लिए की. उन्होंने कभी शुरुआत में कमाई की चिंता नहीं कीबल्कि खुद को अपने हुनर में बेहतर बनाने पर ध्यान दिया.आज वही मेहनत एक मजबूत वृक्ष बन चुकी है, जो उन्हें पहचान भी दे रहा है और आमदनी भी. जिद हो तो रास्ते बनते हैं रुचि अग्रवाल की कहानी यह साबित करती है कि सपने उम्र या परिस्थितियों के मोहताज नहीं होते. जरूरत होती है तो सिर्फ एक छोटे-से कदम की, जो आपको आपकी मंजिल की ओर ले जाए. वे उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने जीवन में कुछ करना चाहती हैं, लेकिन परिस्थितियों के कारण रुक जाती हैं.
