दहलीज से साहित्य शिखर तक
माता-पिता के संस्कार, परिवार के सहयोग और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाने वाली शिक्षिका एवं कवयित्री की प्रेरक जीवन यात्रा। जानिए उनके लेखन, छंद साधना, संस्मरण प्रेम और सफलता के पीछे की कहानी।

माता-पिता के संस्कार, परिवार के सहयोग और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाने वाली शिक्षिका एवं कवयित्री की प्रेरक जीवन यात्रा। जानिए उनके लेखन, छंद साधना, संस्मरण प्रेम और सफलता के पीछे की कहानी।
रभि डागर समकालीन हिंदी साहित्य की उन रचनाकारों में हैं, जिनकी लेखनी संवेदनाओं को शक्ति में बदलने की क्षमता रखती है। उनकी रचनाएँ जीवन की सच्चाई, रिश्तों की ऊष्मा और स्त्री-मन की कोमलता को बेहद सहजता से अभिव्यक्त करती हैं। वे अपने आसपास घटित घटनाओं को केवल देखती नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से महसूस कर शब्दों में ढाल देती हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ बनावटी नहीं, बल्कि जीवन का सजीव प्रतिबिंब प्रतीत होती हैं।
मौसमी चन्द्रा एक बहुमुखी हिंदी लेखिका और संपादिका हैं, जिनकी रचनाएँ भावनात्मक गहराई और सामाजिक सरोकारों से परिपूर्ण हैं।
, हिंदी दिवस के अवसर पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना द्वारा आयोजित विशेष समारोह में जमशेदपुर की सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सविता सिंह ‘मीरा’ को “हिंदी साहित्य सेवी सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ द्वारा प्रदान किया गया।