ऐसा होता तो कैसा होता…

वंशिका परसरामपुरिया, नवोदित लेखिका, मुंबई

चॉकलेट, आइसक्रीम, बर्गर, पिज़्ज़ा पर
GST न होता।
इतिहास–भूगोल के बदले
कार्टून और गानों का इम्तिहान होता।
सही उत्तर सही होता,
गलत उत्तर भी सही होता।

ऐसा होता तो कैसा होता।

काश हम बच्चे होते, बड़े न होते।
Harry Potter असली होता,
Doremon, Pokémon असली होते, Superman असली होता।
दुनिया रंगीन होती,
आज का जश्न मनाते, कल की चिंता न करते।

ऐसा होता तो कैसा होता।

न होता कोई कायदा, न कानून।
सूरज नीला होता और पेड़ों का रंग लाल।
पंछी पानी में होते और मछली गगन में।
विशाल खेतों में उगती टॉफी, और नलों में आती कॉफी।
तारे पेड़ों में टिमटिमाते,
न कोई दुख होता, न कोई डर।

ऐसा होता तो कैसा होता।

मम्मी का भी रिमोट कंट्रोल होता,
जिसका नियंत्रण हमारे हाथ में होता।
मम्मी की डाँट को कर देते fast forward,
तारीफ़ों को कर देते slow motion,
मम्मी की मार को कर सकते pause
बच्चों की सारी गलतियाँ
मम्मी–पापा भी करते।

ऐसा होता तो कैसा होता।

गुलाब में काँटे न होते,
झूठ न होता, भ्रष्टाचार न होता।
ज़हर भी अमृत बन जाता,
ज़िंदगी नफ़रत से नहीं, प्यार से गुजर जाती।
सोनाक्षी को प्यार से नहीं,
थप्पड़ से डर लगता।

ऐसा होता तो कैसा होता।

अगर अलादीन का चिराग होता,
विराट कोहली और शोएब मलिक
एक ही टीम में होते।
लता दीदी और नुसरत फ़तेह अली ख़ाँ
एक साथ गाना गाते।
हम अपने सपने अलमारी से बाहर निकाल पाते।

ऐसा होता तो कैसा होता।

हमारे देश के राजनेता भ्रष्ट न होते,
बाबरी मस्जिद कांड न होता,
कसाब न होता,
पाकिस्तान न होता, आतंकवाद न होता।
मंदिर से जूते भी चोरी न होते।
बंदूक से गोलियाँ नहीं, फूल बरसते।
धर्म न होते, जात–पात न होता,
तो फिर फ़ॉर्म में धर्म का कॉलम भी न होता।

ऐसा होता तो कैसा होता।

हम जैसे चाहते वैसा–वैसा
सब होता वैसा–वैसा।
ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।
काश ऐसा होता तो कैसा होता।

9 thoughts on “ऐसा होता तो कैसा होता…

    1. आज़ पहली बार किसी पागल 🙏की रचना ने मुझे दिल की गहराईयों से छुआ है क्योंकि मैं भी ऐसी ही पागल हु ये तो मेरे ही शब्द विचार है कमाल कमाल 👌👌 likha है आपने बेटा 🫶 आपने प्रकृति और देश की सद्भावना पर जों विचार रखे है
      मजा आगया 😄 पढ़कर हम भी वही सोचते है 🤔ऐसे ही मजे से मन के भाव लिखती रहो 💐💐💐💐 congretsss 👍👍

      1. बहुत शुक्रिया कृष्णाजी आप की टिप्पणी का. बहुत कम होता है ऐसा की कोई वरिष्ठ रचनाकार नवोदित का इस तरह से उत्साहवर्धन करे. एक बार फिर से दिल से धन्यवाद

      2. इतने सुंदर विचारों को कितने अनूठे तरीके से प्रस्तुत किया गया है, यह यथार्थ में प्रशंसनीय है।

  1. वह वंशिका मजा आ गया पढ़कर । काश यह सब संभव होता । खासतौर से मम्मी का रिमोट

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