भारतीय साहित्य जगत में अनेक ऐसी प्रतिभाएं हैं, जिन्होंने अपने अनुभव, संवेदनाओं और सामाजिक जुड़ाव को शब्दों में ढालकर एक अलग पहचान बनाई है उन्हीं में से एक नाम है. विजया डालमिया, जो न केवल एक सशक्त लेखिका हैं, बल्कि सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.
विजयाजी को मेरी तरह नजदीक से जानने वाले लोगों को उनमें एक लेखिका के अलावा एक मां,एक बहन, एक दोस्त और एक सच्ची सलाहकार नजर आएगी. अत्यंत ही जिम्मेदार और प्रेमल महिला हैं विजयाजी. उनकी कथनी और करनी में रत्ती मात्र का भी अंतर नहीं है.
विजयाजी के बारे में एक और बात यह है कि वे हमेशा कहती रहती है कि उनके पास कोई डिग्री नहीं है न कोई साहित्यिक पृष्ठभूमि. वे जो भी लिखती है बस अपने अनुभव और दुनिया को जिस नजर से देखती है या अनुभव करती है बस कागज पर उतार देती है. मुझे तो उनकी डिग्री वाली बात आज तक समझ नहीं आई. आप उनका हिंदी, उर्दू का शब्दकोश उनकी रचनाओं में देखेंगे तो आप भी विश्वास नहीं करेंगे.
विजया डालमिया का जन्म नागपुर में हुआ वर्तमान में वे हैदराबाद में निवासरत हैं उनके पति विनोद डालमिया एक प्रतिष्ठित उद्योगपति हैं उनका परिवार बेहद स्नेहपूर्ण है, जिसमें दो पुत्रविक्की और गोविंदा, पुत्रवधु माधुरी, तथा एक पोता और एक पोती शामिल हैं अपने पोते-पोती को वे स्नेहपूर्वक नैन और चैन कहती हैं, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी हैं
विजया डालमिया ने मई 2021 से साहित्यिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की वे मेरी निहारिका की संपादक के रूप में कार्यरत हैं और इस मंच के माध्यम से साहित्य प्रेमियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं उनकी रचनात्मकता बहुआयामी हैलेख, कहानियाँ और कविताएँ विभिन्न समाचार पत्रों और साझा संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, जीवन के अनुभव और समाज की झलक साफ दिखाई देती है.

विजया डालमिया केवल लेखन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं वे अंतरराष्ट्रीय अग्रवाल समाज की संस्थापक-सदस्य हैं इसके साथ ही काव्य रसिक संस्थान में तेलंगाना राज्य की संरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं. साथ ही वे “उलझन सुलझन” मासिक पत्र की महिला लेखिका इकाई की राष्ट्रीय संयोजिका भी हैं, जहां वे नई प्रतिभाओं को मंच देने और प्रोत्साहित करने का कार्य करती हैं
सम्मान और उपलब्धियां
उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदान को अनेक मंचों पर सराहा गया है उन्हें जयपुर रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया, जिसे अंबालिका शास्त्री द्वारा प्रदान किया गया इसके अतिरिक्त, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन द्वारा सम्मानित किया गया द राइजिंग स्टेप नेशनल मैगजीन ने डॉ. सीमा रामपुरिया के माध्यम से उन्हें सम्मानित किया कादम्बिनी क्लब द्वारा डॉ. अहिल्या मिश्र के माध्यम से उन्हें सम्मान मिला साथ ही एकता फाउंडेशन ने उन्हें ङ्गङ्घराजमाता जिजाऊ राष्ट्रीय गौरव सम्मानफफ से नवाजा
विजया डालमिया के साहित्यिक सफर में दो प्रमुख काव्य संग्रह “दिल जो कह गया “और “भीगे अल्फाज़” प्रकाशित हो चुके हैं इन कृतियों में उनकी संवेदनशील लेखनी और भावनात्मक गहराई का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है विजया डालमिया का व्यक्तित्व साहित्य, परिवार और समाज सेवा का अद्भुत संगम है उन्होंने यह सिद्ध किया है कि अगर मन में जुनून और समर्पण हो, तो किसी भी उम्र में नई शुरुआत कर सफलता हासिल की जा सकती है उनकी लेखनी और सामाजिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं

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