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माँ काली का करुणामय रूप, अपनी भक्त बेटी को आशीर्वाद देती हुई

मेरी प्यारी काली माँ

यह कविता माँ काली के साथ एक बेटी के गहरे आत्मीय रिश्ते को दर्शाती है, जहाँ देवी माँ कभी मित्र, कभी माँ, तो कभी मार्गदर्शक बनकर जीवन में शक्ति और सहारा देती हैं।

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अकेला व्यक्ति अपने टूटे दिल और भावनात्मक दर्द के साथ अंधेरे में बैठा हुआ

अंतर्मन की वेदना

“अंतर्मन की वेदना” एक ऐसी कविता है जो टूटे हुए जज़्बातों और आत्मिक पीड़ा को गहराई से व्यक्त करती है। यह दिखाती है कि कैसे अति संवेदनशीलता कभी-कभी इंसान को भीतर से तोड़ देती है और जीवन उसे कठोर बनना सिखा देता है।

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मंच की चमक के पीछे छिपा सच और अकेला खड़ा एक लेखक

“हाय… क्या हो रहा है…

यह कविता समाज के उस बदलते चेहरे को उजागर करती है जहाँ सच बोलने वाले खामोश कर दिए जाते हैं और मंचों पर समझौते बिकते हैं। यह कलम की ईमानदारी और दिखावे की दुनिया के बीच का तीखा टकराव है।

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बांसुरी बजाते हुए वृंदावन में खड़े श्रीकृष्ण का दिव्य और शांत स्वरूप

करुणा सागर

यह कविता श्रीकृष्ण के विविध रूपों और भक्तों के साथ उनके दिव्य संबंधों को दर्शाती है। मीरा से लेकर द्रौपदी तक, हर भक्त की पुकार में कृष्ण की करुणा और प्रेम झलकता है।

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महंगाई से परेशान आम आदमी और बढ़ती कीमतों का प्रतीकात्मक दृश्य

बढ़ती महंगाई

यह कविता नारद जी और महंगाई के संवाद के माध्यम से समाज की विडंबना को उजागर करती है। महंगाई खुद को निर्दोष बताती है और असली जिम्मेदारी सत्ता और व्यवस्था पर डालती है जो इस व्यंग्य को और भी प्रभावशाली बनाता है।

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नारी शक्ति का प्रचंड रूप, दुर्गा और काली के स्वरूप में अन्याय के खिलाफ खड़ी महिला

रूदन नहीं हुंकार चाहिए

यह कविता नारी के उस रूप को उजागर करती है जो केवल सहन नहीं करती, बल्कि अन्याय के खिलाफ हुंकार भरती है। जब अत्याचार सीमा पार करता है, तो वही नारी काली, दुर्गा और लक्ष्मीबाई बनकर अन्याय का अंत करती है।

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एक भारतीय परिवार का भावनात्मक दृश्य जिसमें दादा-दादी, माता-पिता और एक बेटी पारंपरिक माहौल में साथ खड़े हैं; बेटी आदरपूर्वक बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर रही है, घर में स्नेह, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का वातावरण दिखाई दे रहा है।

रिवाज़ और रिश्तों की रखवाली

यह कविता रिश्तों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों की गहराई को दर्शाती है, जिसमें बुज़ुर्गों का सम्मान, बेटियों की सुरक्षा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का सुंदर संदेश दिया गया है।

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लाल जोड़े में सजी एक भारतीय दुल्हन विदाई के समय आँसुओं से भरी आँखों के साथ पीछे की ओर चावल फेंकती हुई दिख रही है, पास में खड़े माता-पिता भावुक हैं और शादी का सजा हुआ मंडप पृष्ठभूमि में दिखाई दे रहा है।

कन्यादान

यह भावनात्मक कविता एक दुल्हन के विवाह के हर पल को जीवंत करती है शर्माती मुस्कान से लेकर विदाई के आँसुओं तक। इसमें माँ-बाप से बिछड़ने का दर्द, नए जीवन की शुरुआत और रिश्तों की गहराई को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

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“प्रजातंत्र का प्रतीक वन दृश्य”

एक कविता लिखूँगी…

यह कविता जंगल के रूपक के माध्यम से प्रजातंत्र और सत्ता परिवर्तन की गहरी सामाजिक व्याख्या प्रस्तुत करती है। इसमें हिंसक और शक्तिशाली जीवों के स्थान पर शांतिप्रिय और संवेदनशील जीवों को सत्ता सौंपने की कल्पना की गई है। यह केवल एक काल्पनिक बदलाव नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संतुलन की आवश्यकता को दर्शाता है। कविता यह संदेश देती है कि जब भय और शोषण पर आधारित व्यवस्था समाप्त होती है, तब ही वास्तविक प्रजातंत्र स्थापित हो सकता है।

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