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किसको ढोओगे

कविता सत्ता, समाज और मानवता पर गहरा प्रश्न उठाती है। कवि पूछता है. आखिर तुम किसे अपने कंधों पर उठाओगे, किसे बचाओगे? जब नैया मझधार में डूबेगी, तब कौन किसे पार लगाएगा? सत्ता की लालसा में जो सबको मिटा देने की सोच है, वही अंततः विनाश का कारण बनेगी। भारत की धरती हर धर्म, हर जाति का आंचल है. यहाँ कीचड़ में भी कमल खिलता है। लेकिन जब राजनीति भाजन का रूप लेती है, तब वही ताक़त अपने ही हाथों से हार जाती है। गरीब, सच्चे, उज्जवल मन वाले लोग पूछते हैं. क्या हर चुनाव में बस हम पर ही डोरे डालोगे, क्या सबको साथ में मारोगे?

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सच में वही दीपावली होगी

ज्योति सोनी “वैदेही ” अलवर ,राजस्थान दीपावली, अंधेरे रूपी शत्रु के विरोध में सैकड़ों दियों की क्रांति का त्यौहार है। किस तरह नन्हे-नन्हे दिए, अपने साहस को समेटकर पूरी शक्ति और हिम्मत से उस अंधेरे को चीरते हुए धीरे-धीरे जलते हैं, जिसने उन्हें चारों ओर से घेर रखा है। उस कमजोर सी बाती में कितनी…

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विश्व आत्महत्या प्रतिबंध दिवस पर कैंडिल मार्च 13 को

पुणे:जागतिक आत्महत्या प्रतिबंध दिवस (World Suicide Prevention Day) के अवसर पर पुणे में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के लिए कैंडल मार्च का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल कनेक्टिंग ट्रस्ट और रोटरी क्लब ऑफ पुणे सारसबाग की ओर से की जा रही है। मार्च शनिवार, 13 सितंबर 2025, को शाम 6 बजे संभाजी उद्यान,…

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