डर नहीं, दहाड़
अनिता की यह कहानी एक सामान्य-सी नौकरी से शुरू होकर शक्ति, साहस और आत्मसम्मान की विस्फोटक लड़ाई में बदल जाती है। स्कूल डायरेक्टर की कुटिल नीयत, मानसिक खेल और डराने-धमकाने की हर कोशिश को ध्वस्त करते हुए अनिता जिस तरह अपने स्वाभिमान की रक्षा करती है, वह हर उस लड़की की आवाज बन जाती है जो कार्यस्थल पर चुपचाप अन्याय सहती है।
