
डॉ. सुरेशचंद्र पांडेय, प्रसिद्ध लेखक स्वीडन
भारत माँ के लाल अनोखे,
धरती पर अवतार लिए।
संघर्षों में तपकर निकले,
जन-जन के विश्वास लिए।
रक्तिम स्वप्नों को संजोए,
भारत का जयगान किया।
विश्व पटल पर लिए तिरंगा,
भारत का सम्मान किया।
राष्ट्रभक्ति जिनकी पूजा है,
जनसेवा जिनका धर्म है।
हर जन हर मन की आशा,
मोदी का जीवन कर्म है।
नेताजी, सरदार का साहस,
छवि शिवाजी की दिखती
भारत माँ की गोदी में,
वीरता की लौ चमकती।
ओ नरेंद्र! तुम्हारे संकल्पों से
भारत नवयुग की ओर चला।
हर भारतवासी को साहस ने
एक नई पहचान दिया।
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जन-जन के मन में स्वर गूँजे,
वह भारत का सच्चा सपूत।
संघर्षों की राह पकड़ कर,
नया उजियारा जगमगाए।
चाय की गुमटी से उठी कहानी,
आज विश्व मंच तक पहुँची है।
मेहनत, तपस्या, कर्म का फल,
भारत के माथे की बिंदी है।
कठिनाइयों संग हिम्मत जोड़कर,
नवभारत का सपना सँवारा।
विश्वगुरु बनने की राह दिखाकर,
जनता का विश्वास सँभारा।
देशभक्ति की गंगा बहाते,
सबका साथ, सबका विकास।
भारत माँ के सच्चे प्रहरी,
हर दिल में उनका विश्वास।
नम्र स्वभाव पर दृढ़ इरादे,
जनसेवा ही जिनकी पहचान।
मोदी हैं वह दीप शिखा,
जो करे उजाला हिंदुस्तान।

एक राष्ट्र नायक के व्यक्तित्व को बखान करती हुई बहुत ही सुंदर सुगठित एवं उचित शब्दों के साथ कविता के लिए मैं कई सुरेश पांडे को हार्दिक बधाई देता हूं निश्चित तौर पर इस कविता को हम सबके सामने लाने के लिए थे वायर को बहुत-बहुत धन्यवाद आशा करूंगा कि इस तरह की कविताएं कवि के कलम से लिखी जाती रहेगी।