हमको सूरज है बनना

“हमको सूरज है बनना—चाहे जलना पड़े। अंधकार दूर भगाना, पाप मिटाना और जीवन में प्रकाश फैलाना ही हमारा प्रण है। यह कविता साहस, एकता और सेवा की प्रेरणा देती है।”

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गहना

यदि तुम्हें गहना पहनना है तो बेशक पहनो, लेकिन उस नगीने को मत खोना, जिसकी पहचान समय ने तुम्हें बड़ी मुश्किल से कराई है। अब कुदालों की बाट देखना बंद करो और अपनी सुइयाँ उठाओ—वे सुइयाँ जिन्हें जन्म लेते ही तुम्हारे हाथों में थमाया गया था। जब प्यास बढ़े, तो इधर-उधर ताकना मत, बल्कि अपनी तुरपाई वाली सुइयाँ पैनी करो। उसी से निर्मल जल का स्रोत मिलेगा, कुआँ खुदो और अपनी प्यास बुझाओ। इतना करने के बाद भी जीत का जश्न मनाना मना है। जीत की सांसों में हार को भी पहचानो, जो तुम्हें सबसे भावुक पलों में पटखनी देती आई है। इस बीच, ओढ़ लो अपना आत्मविश्वास और अपने सबसे थके हुए दिन को अमर बना दो। जीवन का अभियान सालों में नहीं, बल्कि प्रत्येक दिन में छिपा है। यही सोचकर जीवन की धूप मांग लो और उसे अपने लिए माँगटीका बना दो। सबसे जरूरी है कि तुम अपने लिए हमेशा सुहागिन बने रहो।

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नई राहें, नया सफर

कविता एक नए आरंभ और सकारात्मक सोच का संदेश देती है। यह हमें प्रेरित करती है कि बीते हुए पलों और कठिन अनुभवों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ें। सूरज की नई किरण और आशा की नई रोशनी जीवन में नई संभावनाएँ लेकर आती है। हर अनुभव, चाहे खुशी हो या कठिनाई, हमें कुछ सिखाता है। संघर्षों से डरने की बजाय उन्हें अवसर के रूप में देखें। इच्छाशक्ति और हौसले के साथ, हम अपने जीवन की कहानी को नई शुरुआत के साथ लिख सकते हैं।

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मनचाहे रंग…

वह चित्रकार थी, लेकिन कभी अपने चित्त और आत्मा के अनुरूप पूरी तरह नहीं रंग भर पाई। समाज उसे “बेचारी” कहता था। तब वह कृष्ण के सारथी की तरह अपने रथ को चलाती थी। अब वह स्वतंत्र है—बे लगाम घोड़े दौड़ाती है, वरदान मांगती है, और उपकार के बदले कुछ चाहती नहीं। आसमान नीला नहीं, धरती बंजर और पानी सूखा है, फिर भी वह अपने मनचाहे रंग अपनी आत्मा में भरती है, चाहे वह गणितीय नियमों के आधार पर हों। आज वह अब बेचारी नहीं, बल्कि वैचारगी और सशक्तता का प्रतीक है।

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राष्ट्रनायक नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी केवल एक नेता नहीं, बल्कि भारत माँ के ऐसे सपूत हैं जिन्होंने संघर्षों की भट्टी में तपकर अपनी पहचान बनाई। जनसेवा उनके जीवन का धर्म है और राष्ट्रभक्ति उनकी पूजा।
मोदी ने अपने संकल्पों से भारत को नवयुग की ओर अग्रसर किया। हर कठिनाई के सामने साहस के साथ खड़े होकर उन्होंने जनता को विश्वास और आशा दी। उनका जीवन कर्म, सरदार पटेल के साहस और शिवाजी की वीरता की याद दिलाता है।

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राहें और मंज़िल

हर व्यक्ति की मंज़िल एक ही होती है, पर रास्ते अलग-अलग होते हैं। कोई सीधा लिफ्ट लेकर अपनी मंज़िल तक पहुँच जाता है, तो कोई धैर्य और परिश्रम के साथ सीढ़ियाँ चढ़ता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पहले स्वयं सीढ़ियाँ बनाते हैं और फिर उसी पर चढ़कर अपनी ऊँचाई तक पहुँचते हैं। अंततः सबको अपनी-अपनी राह चुननी पड़ती है। तय करना होता है कि कौन-सा रास्ता उसका है, और फिर बिना रुके, बिना थके बस आगे बढ़ते जाना होता है। जो कदम बढ़ाता है, वही मंज़िल तक पहुँचता है।

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गीता उठा

क्यों रंगहीन हो जीवन तेरा, देखोयह बनफूल फिर से महक उठा। पियुष पी कर हो रहे जो उन्मत्त तब,विषधर की कल्पना से मैं जी उठा। रजत-कंचन ही है, चमकते सोच मत,आग में यूँ ती नहीं, वो जल उठा। अधर्म की जब-जब हो विजय,कर सामना तू धर्म का, धनुष उठा। क्यों दीन-हीन यूँ बन बैठे हो,जरा…

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कर्म हम ऐसा करें…

हर दिन हमारे जीवन में एक नई उमंग और तरंग लेकर आता है। यदि हम अपने कर्म ऐसे करें कि दुनिया हमें देखकर दंग रह जाए, तो यही सच्ची सफलता है। राह में चाहे कांटे हों या शूल, परिस्थितियाँ प्रतिकूल क्यों न हों, सच्चा कर्मवीर अंजाम से नहीं डरता और भूल को कभी दोहराता नहीं। उसका हर काम करने का एक अनोखा और निराला ढंग होता है।

उन्नति की राह पर बढ़ते रहना ही जीवन का ध्येय होना चाहिए। सामने हिमशिखर खड़े हों तो भी उनसे टकराने का साहस रखना चाहिए। आकाश को छूने का जज़्बा होना चाहिए, जैसे उड़ती हुई पतंग। कर्मपथ पर चलते हुए प्रण कभी डगमगाना नहीं चाहिए और न ही ईमान बिकना चाहिए। नए मुकाम हासिल करना और सिर को कभी न झुकाना ही सच्ची जीत है। कर्म ही हमारी काशी-मथुरा हैं, कर्म ही हमारा हाजी मलंग है। यही कर्म हमारी पूजा है, यही कर्म हमारी पहचान है।

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 विश्वास…

जब व्यक्ति अपने विवेक पर अटूट विश्वास रखता है और परिस्थितियों से लड़ने का साहस जुटाता है, तब वह कठिन परिश्रम और अनुशासन के पालन से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। धैर्य और आशा का संबल, असफलताओं से न घबराना और सही दिशा में सतत प्रयास करना सफलता की गारंटी बनते हैं। समयबद्धता का सम्मान, ज्ञान पर भरोसा और हौसला बनाए रखना, मुश्किल घड़ियों में भी व्यक्ति को झुकने नहीं देता। अच्छे कर्मों से व्यक्ति का नाम रोशन होता है, और जब लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहता है, तो सफलता की राह स्वतः प्रशस्त हो जाती है।

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